नक्सल प्रभावित जिलों की कहानी : सुकमा में उखड़ रहे पैर, 13 बड़े नक्सली बचे, फोर्स ने कहा- सरेंडर करो या मरो

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जगदलपुर – केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में छह जिलों को नक्सल प्रभावित माना है। इनमें बस्तर संभाग के सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और कांकेर शामिल हैं। इनमें से सुकमा में फोर्स ने नक्सलियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया है और कई नक्सलियों को एनकाउंटर में मार गिराया। बीते दो साल में 65 दुर्दात नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया है। इस वर्ष बीते 51 दिन में ही 12 नक्सलियों को सुकमा जिले के अलग अलग इलाकों में हुए मुठभेड़ों में मार गिराने में फोर्स सफल रही है। अब सुकमा में केवल 13 हथियार बंद नक्सली बचे हैं। इनमें डीवीसी मेंबर राजे समेत निचले कैडर के नक्सली शामिल हैं।

फोर्स ने कहा है कि सरेंडर करके मुख्यधारा में शामिल हो जाएं नहीं तो खात्मा किया जाएगा। देवजी व पापाराव भी सक्रियः मोस्ट वांटेड  नक्सली पोलित ब्यूरो मेंबर व प्रभारी सेंट्रल मिलिट्री कमीशन थिप्परी तिरूपति उर्फ देवजी, डीकेएसजेडसीएम, प्रभारी व सचिव पश्चिम बस्तर डिविजन कमेटी पापाराव कुड़ाम उर्फमंगू तथा सोढ़ी केसा की भी सरगर्मी से तलाश की जा रही है।

निर्धारित तिथि तक समर्पण नहीं करने पर इन तीन टॉप मोस्ट नक्सलियों के अलावा अन्य सक्रिय नक्सलियों को जल्द ही टारगेट किया जाएगा। एसपी का कहना है कि यदि नक्सली सरेंडर करने आगे आते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा, लेकिन यदि वो नहीं मानते है तो फोर्स अपने हिसाब से काम करेगी। 31 मार्च 2026 में अब केवल 38 दिन शेष है और हमारा पूरा प्रयास है कि वे समर्पण कर मुख्यधारा में शामिल हो जाएं, नहीं तो आने वाले कुछ दिन में नक्सलवाद का खात्मा पूर्ण रूप से हो जाएगा।

आत्मसमर्पण कर रहे हैं नक्सली
सरकार के नक्सलवाद के खात्मे के डेड-लाइन जारी होने के बाद आत्म समर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या में इजाफा हुआ है। वर्ष 2024 में 326, 2025 में 273 तथा वर्ष 2026 में 102 नक्सली समर्पण कर चुके है। वर्ष 2024 से आज पर्यन्त तक नक्सलियों से मुठभेड़ों व गिरफ्तारी के दौरान 186 अत्याधुनिक हथियार भी बरामद किए जा चुके हैं।

इन वर्षों में नक्सलियों के सबसे घातक हथियार माने जाने वाले कमांड व प्रेशर आईईडी की संख्या 141 है, जो नक्सल अभियान के दौरान बरामद किया जा चुका है। नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान नक्सलियों को बहादुरी से मुकाबला करते हुए वर्ष 2024 से अब तक सात जवानों की शहादत हुई है।

मोस्ट वाटेंड राजे समेत 13 की तलाश जारी 
सुकमा जिले की बात करें तो हथियारबंद नक्सलियों की संख्या केवल 13 है। इनमें डीवीसी राजे के अलावा निचले कैडर के अन्य 12 नक्सली शामिल हैं। एसपी किरण चौहान का कहना है कि निर्धारित डेड-लाइन से पूर्व आत्मसमर्पण नहीं करने पर इन्हें ढूंढकर समाप्त कर दिया जाएगा। राजे केरलापाल डिविजन कमेटी की मेंबर है, जो वर्तमान में इलाके में सक्रिय है। एसपी का कहना है कि नक्सली सरेंडर कर दें, इसके लिए भरसक कोशिश की जा रही है, लेकिन यदि नक्सली सरेंडर नहीं करते है तो जवान उनसे निपटने लगातार ऑपरेशन चला ही रहे है।

मार्च तक खत्म करने का संकल्प
बस्तर आईजी सुंदरराज पट्टलिंगम ने बताया कि, मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प की प्राप्ति करने सातों जिलों में समन्वित और बहुस्तरीय कार्ययोजना लागू की गई है, जिसके अंतर्गत विशेष रूप से सुकमा, बीजापुर एवं नारायणपुर जिलों में लक्षित रणनीतिक अभियान संचालित किए जा रहे हैं। जनता के सहयोग, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और प्रशासन की दृढ़ प्रतिबद्धता के बल पर बस्तर शीघ्र ही पूर्ण शांति, सुरक्षा और सतत विकास का सशक्त उदाहरण बनकर उभरेगा और बस्तर व छग से जल्द ही नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा।

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