टीनएज सोशल मीडिया बैन पर टकराव: टेक दिग्गजों की लॉबिंग तेज, ईयू में 1615 करोड़ रुपए खर्च

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अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां—जैसे Meta Platforms और Google—एक नए दबाव का सामना कर रही हैं। कई देश किशोरों के लिए इंस्टाग्राम, यूट्यूब और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म पर सख्ती या प्रतिबंध की तैयारी कर रहे हैं। सरकारों का तर्क है कि ये ऐप्स लत लगाने वाले हैं और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालते हैं।

इसके जवाब में टेक कंपनियों ने यूरोप में जोरदार लॉबिंग अभियान छेड़ दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूरोपीय संसद में संभावित प्रतिबंधों को रोकने के लिए अमेरिकी कंपनियों ने पिछले वर्ष करीब 1615 करोड़ रुपए खर्च किए। 720 सदस्यीय यूरोपीय संसद में सोशल मीडिया बैन से जुड़े विधेयक पेश हो चुके हैं, और उद्योग जगत इन प्रस्तावों को रोकने के लिए सक्रिय है।

कॉरपोरेट यूरोपियन ऑब्जर्वेटरी और लॉबी कंट्रोल संगठनों के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच इंडस्ट्री के पक्ष में फैसले प्रभावित करने के प्रयासों में 55% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। सबसे अधिक खर्च मेटा ने किया, उसके बाद गूगल का नंबर आता है।

याचिकाकर्ताओं ने इंस्टाग्राम और यूट्यूब को “डिजिटल कैसिनो” करार दिया है। उनका आरोप है कि अनंत स्क्रॉलिंग जैसे फीचर किशोरों को लंबे समय तक स्क्रीन से जोड़े रखते हैं, जिससे लत की प्रवृत्ति बढ़ती है।

प्रतिबंध के बजाय ‘नियंत्रित विकल्प’ की रणनीति

टेक कंपनियां मानती हैं कि यूरोपीय संघ के 27 देशों में लागू होने वाला कोई भी नया कानून वैश्विक संचालन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए वे पूर्ण प्रतिबंध के बजाय वैकल्पिक उपायों की वकालत कर रही हैं। मेटा ने ‘टीन अकाउंट्स’ का प्रस्ताव रखा है, जिसमें 16 वर्ष से कम आयु के यूजर्स के अकाउंट पर अभिभावकीय नियंत्रण रहेगा। कुछ कंपनियां 15 या 16 वर्ष से कम उम्र के लिए माता-पिता की अनिवार्य सहमति का सुझाव दे रही हैं।

यूरोपीय आयोग इस मुद्दे पर चर्चा को तैयार हो गया है। ‘डिजिटल फेयरनेस एक्ट’ के प्रारूप प्रस्ताव पर इस वर्ष ब्रसेल्स में मतदान संभव है।

होर्डिंग से लेकर हाई-प्रोफाइल विज्ञापन तक

वाशिंगटन स्थित ट्रेड ग्रुप ‘कंप्यूटर एंड कम्युनिकेशन इंडस्ट्री एसोसिएशन’ ने ब्रसेल्स के रेलवे स्टेशनों पर बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए हैं, जिनमें सोशल मीडिया प्रतिबंधों को खारिज करने की अपील की गई है। विज्ञापनों में यूरोपीय नवाचार के प्रतीक जोहान्स गुटेनबर्ग और गुग्लिएल्मो मार्कोनी जैसे नाम शामिल किए गए। पिछले साल नवंबर में मेटा ने यूरोप के अखबारों में पूरे पेज के विज्ञापन प्रकाशित किए।

890 लॉबिस्ट सक्रिय

ब्रसेल्स में करीब 890 फुलटाइम लॉबिस्ट सक्रिय हैं—जो यूरोपीय संसद के सदस्यों की संख्या से भी अधिक हैं। ये लॉबिस्ट न सिर्फ सोशल मीडिया बैन का विरोध कर रहे हैं, बल्कि यूरोप के एआई कानून और डेटा प्राइवेसी नियमों को भी प्रभावित करने की कोशिश में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2024 से दिसंबर 2025 के बीच मेटा ने सांसदों के साथ 38 बैठकें कीं।

वैश्विक स्तर पर सख्ती की पहल

दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया ने किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लागू किया। फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क भी नीति पर विचार कर रहे हैं। अमेरिका के आठ राज्यों में भी किशोरों के सोशल मीडिया उपयोग को सीमित करने के विधेयक पेश किए गए हैं।

स्पष्ट है कि डिजिटल युग में किशोरों की सुरक्षा बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल अब वैश्विक बहस बन चुका है। टेक कंपनियां इसे संतुलित नियमन का मामला बता रही हैं, जबकि कई सरकारें सख्त कदम उठाने के पक्ष में हैं। आने वाले महीनों में यूरोप का फैसला इस बहस की दिशा तय कर सकता है।

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