विधानसभा में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपए का बजट पेशकर विकास का रोडमैप रखा। इसमें राजधानी को लगभग ₹506.5 करोड़ की परियोजनाएं मिली हैं। कालीबाड़ी में 200 बिस्तर का मातृ-शिशु अस्पताल, मेकाहारा में एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट का विस्तार, शहर में 5 बड़े फ्लाईओवर समेत 13 ब्रिज बनेंगे। बिजली केबल को अंडरग्राउंड करने की योजना, नवा रायपुर में डिजिटल और स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास व मेगा परीक्षा केंद्र की स्थापना जैसे जरूरी ऐलान किए गए हैं। घरेलू उड़ानों के विस्तार और एयरस्ट्रिप उन्नयन के लिए 80 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। रायपुर-जगदलपुर-रायपुर उड़ान दोबारा शुरू होगी।
15 साल से अटका चौड़ीकरण, अब फ्लाईओवर बनेगा
तात्यापारा से शारदा चौक तक सड़क चौड़ीकरण 15 साल से मुआवजे की ऊंची लागत के कारण अटका है। अब जाम से राहत के लिए टू-लेन फ्लाईओवर बनेगा। सर्वे में 102 दुकानें और मकान प्रभावित पाए गए हैं। जमीन अधिग्रहण व निर्माण पर करीब 137 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान है। वर्तमान चौड़ाई 12 से 14 मीटर है, जबकि फूल चौक के पास 12 मीटर होने से बॉटलनेक बनता है। सुबह-शाम पीक आवर में रोज घंटों जाम लगता है।
200 सीटर ओबीसी हॉस्टल, छत्तीसगढ़ कॉलेज बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
सरकार रायपुर में पिछड़े वर्ग की छात्राओं के लिए 200 सीटों का पोस्ट मैट्रिक छात्रावास बनाएगी। रायपुर सहित सभी नालंदा पुस्तकालयों में करियर काउंसलिंग केंद्र के लिए 10 करोड़ रुपए का प्रावधान है। जे. योगानंदम महाविद्यालय समेत 5 कॉलेज सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेंगे (15 करोड़)। अटारी कॉलेज पीजी में अपग्रेड होगा। 6 जिलों में सीजीआईटी (38 करोड़), 36 इंक सीजी व एसटीपीआई सेंटर (35 करोड़) और विश्वविद्यालयों को विशेष बजट दिया गया है। रायपुर में पहला होमियोपैथी कॉलेज भी बनाया जाएगा।
कमिश्नरी के भीतर खुलेंगे दो नए थाने, तेलीबांधा थाना हाईटेक होगा
कमिश्नरी में सरोना और जरवाय में दो नया थाना खोला जाएगा। डीडी नगर को विभाजित कर सरोना में नया थाना खोला जाएगा। इसमें डीडी नगर और आमानाका का इलाका शामिल किया जाएगा। इसी तरह जरवाय में भी नया थाना खोला जाएगा। इसमें कबीर नगर, आमानाका और उरला के इलाकों को मिलाकर नया थाना बनाया जाएगा। वहीं, छत्तीसगढ़ पुलिस हाउसिंग बोर्ड द्वारा कोतवाली और आमानाका की तर्ज पर तेलीबांधा थाना को भी हाईटेक किया जाएगा। नई हाईटेक बिल्डिंग बनाई जाएगी। इसके बाद खम्हारडीह थाना का नया भवन बनाया जाएगा।
पिछले बजट की घोषणाएं अधूरी, कई परियोजनाएं ठंडे बस्ते में
पिछले बजट में कई बड़ी घोषणाएं हुईं, लेकिन अधिकांश योजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकीं। अंबेडकर में प्रस्तावित आईवीएफ सेंटर शुरू नहीं हुआ। 14.70 किमी एक्सप्रेस-वे टू (मोवा अंडरब्रिज से जोरा) के लिए 1295 करोड़, 6 ओवरब्रिज और 5 डबल डेकर का प्रावधान था, पर काम अटका है। खालसा स्कूल–मोवा थाना ओवरब्रिज, फुंडहर ओवरपास, टर्निंग प्वाइंट फ्लाईओवर आगे नहीं बढ़े। गोंदवारा-खमतराई चौड़ीकरण मुआवजे में रुका। मंडीगेट अंडरब्रिज, भाटागांव-काठाडीह व काठाडीह-महादेव घाट सड़कें लंबित हैं। कमल विहार व सिलतरा थाना अब भी चौकी ही हैं।
रायपुर बनेगी राज्य की पहली साइबर तहसील राज्य में जमीन से जुड़े मामलों की ऑनलाइन सुनवाई के लिए साइबर तहसील स्थापित की जा रही है। रायपुर पहली पूर्णतः ऑनलाइन तहसील बनेगी। इसके लिए प्रदेशभर में 25 करोड़ रुपए खर्च होंगे। रायपुर में हाईटेक तहसील भवन निर्माणाधीन है। योजना से नामांतरण, बंटवारा और अन्य राजस्व मामलों का फेसलेस और त्वरित निराकरण संभव होगा। पक्षकारों की सुनवाई भी ऑनलाइन होगी।
पहला जीएसटी कॉल सेंटर, सभी जानकारी मिलेगी व्यापारियों की जीएसटी संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए राज्य का पहला जीएसटी कॉल सेंटर नवा रायपुर स्थित जीएसटी भवन में खोला जाएगा। जीएसटी 2.0 सुधार के तहत यह पहल की जा रही है। कॉल सेंटर से छोटे-बड़े सभी व्यापारियों को कर नियमों, रिटर्न और तकनीकी प्रक्रियाओं की जानकारी मिलेगी। इससे कर व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी तथा व्यापारियों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
अब एयरपोर्ट पर खुलेंगे हैंडीक्राफ्ट शो-रूम प्रदेश के बुनकरों और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, कोरबा और अंबिकापुर एयरपोर्ट पर हैंडीक्राफ्ट शो रूम खोले जाएंगे। रायपुर एयरपोर्ट पर फिलहाल ब्रांडेड कंपनियों के ही आउटलेट हैं। नई पहल से राज्य की पारंपरिक कलाकृतियों को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी। शो रूम का संचालन हथकरघा विभाग करेगा। इससे यात्रियों को उचित कीमत पर गुणवत्तापूर्ण हस्तशिल्प उत्पाद मिल सकेंगे।
राजधानी में बनेगी सीएसयू, जांच में आसानी होगी टैगोर नगर स्थित राज्य फॉरेंसिक लैब में सीन ऑफ क्राइम यूनिट (सीएसयू) की स्थापना की जाएगी। इसके लिए बजट में 3.50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसमें फॉरेंसिक विशेषज्ञों और जांचकर्ताओं की एक विशेष टीम होगी, जो अपराध स्थल का दस्तावेजीकरण करने, सबूत जुटाने और उनका विश्लेषण करने के लिए जिम्मेदार होती है। वैज्ञानिक जांच द्वारा अपराधियों को पकड़ा जा सके।