क्रशर ब्लास्ट में स्कूल की छत टूटी : चार लोगों पर एफआईआर, दो भेजे गए जेल

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दंतेवाड़ा – गीदम-जगदलपुर मार्ग पर जावंगा स्थित लक्ष्मी मेटल एंड इंडस्ट्रीज क्रशर में अनियंत्रित ब्लास्टिंग ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। विस्फोट के दौरान लगभग 50 किलो से अधिक वजनी पत्थर 200 से 300 मीटर दूर तक जा गिरे। इनमें से एक बड़ा पत्थर नवीन प्राथमिक शाला कोसापारा बड़े पनेड़ा की कंक्रीट छत तोड़ते हुए कक्षा के भीतर जा गिरा। घटना शाम लगभग चार बजे हुई। उस समय स्कूल में छात्र-शिक्षक मौजूद नहीं थे, जिससे बडा हादसा टल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ पत्थर स्कूल के पीछे के हिस्से में भी पाए गए। क्रशर के सामने स्थित ढाबा तथा लगभग 300 मीटर दूरी पर स्थित सीआरपीएफ कैंप परिसर के आसपास भी पत्थर गिरने की पुष्टि हुई है। यदि ब्लास्टिंग स्कूल समय में होती तो गंभीर जनहानि की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता था।

संचालक और मैनेजर फरार
मामले में डीएसपी गोविंद दीवान ने बताया कि,  क्रशर संचालक टी. रमेश, मैनेजर इजराइल, ब्लास्टर और असिस्टेंट ब्लास्टर के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 288, 324(5), 326 (7) तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 03 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। धारा 326 (7) गैर-जमानती है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ब्लास्टर और असिस्टेंट ब्लास्टर को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उन्हें 15 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। संचालक और मैनेजर फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। जांच पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा गौरव राय की निगरानी में चल रही है। सूत्रों के अनुसार आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है।

सर्फेस क्लीनिंग नहीं की
जानकारों का कहना है कि ब्लास्टिंग से पहले सर्फेस क्लीनिंग अनिवार्य प्रक्रिया है, जिससे पहले से मौजूद ढीले पत्थर दूर तक न उछलें। लेकिन गुरुवार को ब्लास्टिंग के दौरान यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। वहीं इस ब्लास्टिंग में आवश्यकता से अधिक विस्फोटक के उपयोग की बातें भी सामने आई है। पत्थरों का 300 मीटर तक छिटकना सामान्य नहीं माना जाता।

नियमों की अनदेखी
क्रशर राष्ट्रीय राजमार्ग से लगभग 100 से 150 मीटर दूरी पर संचालित हो रहा है और बीते नौ वर्षों से यहां संचालन जारी है। आरोप है कि निर्धारित 1.4 हेक्टेयर भूमि से अधिक क्षेत्र में खनन किया जा रहा है। परिसर में सुरक्षा फेंसिंग तक नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में भी तेज ब्लास्टिंग की शिकायतें की गई थीं। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि ब्लास्टिंग से पूर्व गीदम थाने को सूचना नहीं दी गई। थाना प्रभारी विजय पटेल के अनुसार केवल विस्फोटक ले जाने की सूचना दी गई थी, ब्लास्टिंग की नहीं। जबकि प्रत्येक ब्लास्ट से पहले थाने को सूचित करना और सुरक्षा के तहत मार्ग अवरुद्ध करना अनिवार्य है।

जांच तक प्लांट बंद
एसडीएम गीदम मनीष बघेल ने संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और जांच पूरी होने तक क्रशर प्लांट का संचालन बंद करा दिया है। घटना के बाद स्कूल की क्षतिग्रस्त छत की मरम्मत कराई गई, लेकिन शिक्षा विभाग से पूर्व अनुमति नहीं ली गई। डीईओ प्रमोद ठाकुर ने कहा कि बिना अनुमति मरम्मत की गई है तो नियमानुसार कार्रवाई होगी। कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने एसडीएम, माइनिंग इंस्पेक्टर और तहसीलदार की संयुक्त जांच टीम गठित की है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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