Meta Pixel

तनाव से ‘रीसेट’ तक—भारत दौरे पर कनाडाई पीएम, ट्रेड-इन्वेस्टमेंट और ऊर्जा डील पर नजर

Spread the love

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी चार दिन के भारत दौरे पर पहुंच रहे हैं। यह उनकी प्रधानमंत्री के तौर पर पहली भारत यात्रा है और इसे दोनों देशों के रिश्तों में “रीसेट मोमेंट” के रूप में देखा जा रहा है। दौरे का केंद्र बिंदु व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा सहयोग को नई रफ्तार देना है—ऐसे समय में जब पिछले दो वर्षों में द्विपक्षीय संबंध गंभीर तनाव से गुजरे हैं।

नई दिल्ली में 2 मार्च को कार्नी की मुलाकात प्रधानमंत्री Narendra Modi से तय है। बातचीत का प्रमुख एजेंडा लंबे समय से ठप पड़ी कंप्रीहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) वार्ता को फिर शुरू करना है। लक्ष्य यह है कि व्यापक आर्थिक समझौते को अगले लगभग 12 महीनों में आगे बढ़ाया जाए और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50–70 अरब डॉलर के स्तर तक ले जाने की दिशा में रोडमैप तैयार हो।

मुंबई में कार्नी बिजनेस लीडर्स से मिलकर इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में निवेश के अवसरों पर चर्चा करेंगे। कनाडा के बड़े पेंशन फंड पहले ही भारत के रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में उल्लेखनीय निवेश कर चुके हैं; अब फोकस निवेश को और विविध व गहरा करने पर है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 21 अरब डॉलर से अधिक है और भारत में 600 से ज्यादा कनाडाई कंपनियां सक्रिय हैं।

ऊर्जा इस दौरे का अहम स्तंभ है। यूरेनियम सप्लाई पर लगभग 10 साल की अवधि के लिए 2.8 अरब कनाडाई डॉलर के संभावित समझौते की चर्चा है, जिससे भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को स्थिर ईंधन आपूर्ति मिल सकती है। इसके साथ ही LNG, भारी कच्चे तेल, महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ ऊर्जा ट्रांजिशन पर सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश की जाएंगी। 2024 में कनाडा के कुल ऊर्जा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत सीमित रही, जिसे अब बढ़ाने पर जोर है।

यात्रा से पहले कनाडाई अधिकारियों के बयानों ने संकेत दिया है कि ओटावा भारत के खिलाफ पूर्व में लगाए गए कुछ गंभीर आरोपों के स्वर को नरम कर रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यदि कनाडा को भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप का ठोस आकलन होता, तो प्रधानमंत्री यह यात्रा नहीं करते। यह रुख दोनों देशों के बीच संवाद बहाली की कोशिशों को रेखांकित करता है।

पृष्ठभूमि में 2023–24 के दौरान संबंधों में तेज गिरावट रही, जब पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में आरोप-प्रत्यारोप, राजनयिक निष्कासन और वीजा सेवाओं पर असर जैसे कदम उठे। CEPA वार्ता भी ठप हो गई थी। कार्नी के मार्च 2025 में पद संभालने के बाद से रिश्ते सुधारने की कोशिशें तेज हुई हैं—राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की बातचीत और कानून-प्रवर्तन संपर्क बढ़ाने पर सहमति इसका हिस्सा है।

कनाडा की सामाजिक-आर्थिक संरचना में प्रवासियों की बड़ी भूमिका है—2021 की जनगणना के मुताबिक करीब 23% आबादी विदेश में जन्मी है। भारतीय मूल के लगभग 16 लाख लोग वहां रहते हैं। हाल के महीनों में कनाडा ने आप्रवासन नियमों के अनुपालन पर सख्ती भी दिखाई है; 2025 के पहले 10 महीनों में 2,831 भारतीय नागरिकों को निष्कासित किए जाने के आंकड़े सामने आए, जिनमें कई मामलों में आपराधिक या शरणार्थी दावों से जुड़े नियमों का उल्लंघन शामिल बताया गया।

कुल मिलाकर, यह दौरा राजनीतिक मतभेदों की पृष्ठभूमि में आर्थिक व्यावहारिकता को प्राथमिकता देने की कोशिश है। यदि CEPA वार्ता पटरी पर आती है और ऊर्जा-खनिज सहयोग पर ठोस प्रगति होती है, तो भारत-कनाडा संबंध नए संतुलन के साथ आगे बढ़ सकते हैं—जहां रणनीतिक हित, निवेश और टेक्नोलॉजी साझेदारी प्रमुख चालक बनें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *