दिल्ली के जोर बाग इलाके में शिया समुदाय के लोगों ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयतुल्लाह अली खामेनेई के निधन पर कैंडल मार्च निकालकर श्रद्धांजलि दी। मार्च में बड़ी संख्या में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हुए। लोगों ने शोक व्यक्त करते हुए क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर गहरा आक्रोश भी जताया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 1 मार्च को आयोजित यह मार्च दरगाह शाह-ए-मरदान से शुरू होकर करबला, जोर बाग तक पहुंचा। प्रतिभागियों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर मौन श्रद्धांजलि दी। आयोजन जोर बाग अंजुमन-ए-हैदरी के बैनर तले हुआ, जिसमें मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी मुख्य संरक्षक रहे।
मार्च के दौरान कुछ स्थानों पर अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारेबाजी की गई। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने हालिया घटनाओं पर नाराजगी जताते हुए भावनात्मक बयान दिए।
कार्यक्रम में लद्दाख के सांसद हाजी मोहम्मद हनीफा जान भी शामिल हुए। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि खामेनेई ने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और उनके निधन को वे “इज्जत की मौत” के रूप में देखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह घटना वैश्विक स्तर पर मानवीय दृष्टिकोण से बड़ा नुकसान है और भारत-ईरान संबंध ऐतिहासिक रहे हैं।
पूरे आयोजन के दौरान पुलिस और प्रशासन की निगरानी रही। कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, हालांकि कुछ हिस्सों में तीखी प्रतिक्रियाएं भी सुनाई दीं।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर भारत सहित कई देशों में देखने को मिल रहा है। दिल्ली का यह कैंडल मार्च उसी व्यापक वैश्विक परिदृश्य की एक झलक माना जा रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का प्रभाव स्थानीय स्तर पर भी महसूस किया जा रहा है।