छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में एक गर्भवती महिला की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। सर्दी-खांसी के इलाज के लिए गई महिला की हालत क्लिनिक में ही बिगड़ गई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। बाद में जब प्रशासन ने जांच की, तो कथित डॉक्टर के क्लिनिक से अवैध दवाइयों के साथ गांजा भी बरामद हुआ। बिना मेडिकल डिग्री के 17 साल से इलाज कर रहे आरोपी को अब गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
यह मामला पलारी थाना क्षेत्र के छेरकाडीह जारा गांव का है। जानकारी के मुताबिक अजय साहू की पत्नी इंदु साहू, जो करीब चार महीने की गर्भवती थीं, गुरुवार को सर्दी-खांसी की शिकायत लेकर गांव के ही जयंत साहू के क्लिनिक पहुंची थीं। जयंत साहू गांव का सरपंच भी है और बिना डिग्री के इलाज करता रहा है।
परिजनों का कहना है कि इंदु पहली बार क्लिनिक पहुंचीं तो डॉक्टर वहां मौजूद नहीं था, जिसके बाद वे घर लौट आईं। थोड़ी देर बाद डॉक्टर के लौटने की सूचना मिली तो वे दोबारा उसके पास गईं। करीब 15-20 मिनट तक वह क्लिनिक में रहीं। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उन्हें उल्टियां होने लगीं, चक्कर आया और वे बेहोश होकर गिर पड़ीं।
डॉक्टर ने दावा किया कि महिला ने खाना नहीं खाया था और सिर्फ सर्दी-खांसी व सीने में दर्द की शिकायत थी। लेकिन हालात तेजी से बिगड़ते देख उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पलारी भेजा गया। अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि महिला की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी। परिजनों ने बताया कि महिला के नाक से झाग और खून निकल रहा था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि परिवार ने पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया और शाम को लिखित आवेदन देकर शव अपने साथ ले गए। उसी दिन अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। इस पूरे मामले में पुलिस थाने में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई।
घटना की जानकारी मिलते ही राजस्व, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए क्लिनिक को सील कर दिया। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में अवैध दवाइयां और गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने आरोपी जयंत साहू के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
थाना प्रभारी परिवेश तिवारी के अनुसार आरोपी के पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं थी और वह करीब 17 साल से इलाज कर रहा था। पूछताछ के बाद उसे बलौदाबाजार न्यायालय में पेश किया गया, जहां न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उसे जेल भेजने का आदेश दिया।
यह घटना न केवल अवैध चिकित्सकीय प्रैक्टिस पर सवाल खड़े करती है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और जागरूकता के अभाव को भी उजागर करती है। एक मासूम परिवार ने मां और अजन्मे बच्चे को खो दिया, और अब जांच के बाद ही साफ होगा कि मौत की असली वजह क्या थी।