टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में शानदार प्रदर्शन कर सुर्खियों में आए भारतीय बल्लेबाज Sanju Samson ने इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में शतक से चूकने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अफसोस नहीं है, क्योंकि सबसे अहम बात टीम को जीत दिलाना था। सैमसन ने साफ शब्दों में कहा कि जब टीम को जरूरत थी, तब उन्होंने मैच जिताने वाली पारी खेली और यही उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।
दरअसल, टी-20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भारत ने इंग्लैंड को रोमांचक मुकाबले में हराकर फाइनल में जगह बनाई। मुंबई के Wankhede Stadium में खेले गए इस मुकाबले में सैमसन ने बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। इससे पहले वेस्टइंडीज के खिलाफ करो या मरो मुकाबले में भी उन्होंने शानदार पारी खेली थी, जिसकी बदौलत भारत सेमीफाइनल तक पहुंच सका। दोनों मैचों में शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
सैमसन का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि टूर्नामेंट शुरू होने से ठीक पहले खराब फॉर्म के कारण उन्हें टीम की प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया था और उनकी जगह Ishan Kishan को मौका दिया गया था। हालांकि टीम संयोजन में बदलाव के बाद सैमसन को फिर से टॉप ऑर्डर में मौका मिला और उन्होंने लगातार दो मैचों में शानदार पारियां खेलकर टीम के भरोसे को सही साबित किया।
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैमसन ने बताया कि कठिन समय के दौरान उन्होंने खुद को बाहरी शोर से पूरी तरह दूर कर लिया था। उन्होंने कहा कि मुश्किल दौर में उनके करीबी लोगों ने उनका साथ दिया और वही उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बने। सैमसन ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बना ली थी और अपना पूरा ध्यान केवल अपने खेल पर लगाया।
उन्होंने कहा कि जब उनके करियर में चुनौतीपूर्ण समय चल रहा था, तब उन्होंने अपने फोन और सोशल मीडिया से दूरी बना ली थी। कम लोगों से बातचीत और कम शोर ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में मदद की। इसी वजह से वे अपने लक्ष्य पर फोकस कर पाए और मैदान पर बेहतर प्रदर्शन कर सके।
सैमसन ने यह भी स्वीकार किया कि उनके लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से देश के लिए बड़ा योगदान देना चाहते थे और वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में टीम के लिए मैच जीतना उनका सपना था। उन्होंने माना कि न्यूजीलैंड सीरीज के दौरान शायद वह जरूरत से ज्यादा कोशिश कर रहे थे, लेकिन अब उन्होंने अपने खेल को सरल रखने और सही मौके पर प्रदर्शन करने पर ध्यान दिया।
इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में सैमसन ने निस्वार्थ अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए भारत को 250 से अधिक के मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी इस पारी की बदौलत भारत ने 253 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया और अंत में इंग्लैंड को सात रन से हराकर फाइनल में जगह बना ली।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने पिछले दो मैचों में दो शतक बनाने का मौका गंवा दिया, तो सैमसन ने बेहद आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई सेंचुरी मिस नहीं की है, बल्कि उन्होंने 97 और 89 रन की दो शानदार पारियां खेली हैं, जो टीम के लिए काफी अहम थीं।
सैमसन ने कहा कि क्रिकेट में कई बार किस्मत साथ नहीं देती, लेकिन कभी-कभी किस्मत आपके पक्ष में भी काम करती है। उनके मुताबिक वह खुद को खुशकिस्मत मानते हैं कि उन्हें इस तरह के मौके मिले और उन्होंने टीम के लिए योगदान दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अगली बार मौका मिला तो वह और ज्यादा आक्रामक तरीके से खेलेंगे।
पारी की शुरुआत को लेकर सैमसन ने बताया कि मैच शुरू होने से पहले ही उन्हें और उनके ओपनिंग पार्टनर Abhishek Sharma को यह अंदाजा हो गया था कि विकेट बल्लेबाजी के लिए काफी अच्छा है। इसलिए टीम ने तय किया था कि भारत को कम से कम 250 रन का सुरक्षित स्कोर बनाना होगा।
उन्होंने कहा कि ड्रेसिंग रूम में यह भी चर्चा हो रही थी कि दूसरी पारी में ओस का असर पड़ेगा या नहीं, लेकिन टॉस से पहले ही पिच देखकर साफ हो गया था कि यह बल्लेबाजी के लिए अनुकूल विकेट है। यही वजह थी कि टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक रणनीति अपनाई और बड़ा स्कोर खड़ा करने की कोशिश की।
सैमसन की इस शानदार फॉर्म ने टीम इंडिया को फाइनल तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है और अब भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की उम्मीदें उनसे और पूरी टीम से फाइनल मुकाबले में भी बेहतरीन प्रदर्शन की हैं।