छत्तीसगढ़ के Bande और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बिजली व्यवस्था इन दिनों गंभीर समस्या बन गई है। पिछले करीब एक महीने से क्षेत्र में अघोषित रूप से बिजली कटौती की जा रही है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग मेंटेनेंस का हवाला देकर घंटों बिजली आपूर्ति बंद कर देता है, लेकिन इसके लिए कोई तय समय या सूचना नहीं दी जाती।
लगातार हो रही बिजली की आंख-मिचौली से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। यहां बिजली के आने-जाने का कोई निश्चित समय नहीं है, जिसके कारण लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। शुक्रवार को इसी समस्या से परेशान ग्रामीणों और किसानों ने बिजली विभाग के कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया और अपनी नाराजगी जाहिर की।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर तेज गर्मी का मौसम है और दूसरी ओर लगातार बिजली कटौती के कारण कई जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। बिजली नहीं रहने से घरों में पानी की आपूर्ति भी बाधित हो रही है, जिससे लोगों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार सुबह से शाम तक बिजली गुल रहने के कारण स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है।
किसानों ने बताया कि इस समय खेतों में सिंचाई के लिए बिजली की बेहद जरूरत है। लेकिन लगातार हो रही कटौती के कारण सिंचाई का काम प्रभावित हो रहा है और इससे फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग के अधिकारी इस समस्या पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय गोलमोल जवाब दे रहे हैं।
ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि बिजली आपूर्ति की समस्या का जल्द समाधान किया जाए और नियमित बिजली उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही स्थिति नहीं सुधरी तो क्षेत्र के किसान उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर वे चक्का जाम जैसे कदम भी उठा सकते हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
दरअसल Paralkot क्षेत्र में इस समय किसानों के खेतों में बड़े पैमाने पर मक्के की फसल लगी हुई है। गर्मी बढ़ने के साथ फसल को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है, लेकिन पिछले एक महीने से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था चरमरा जाने के कारण खेतों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इससे मक्के की फसल सूखने लगी है और किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर बिजली आपूर्ति को नियमित करने की मांग की है।