छत्तीसगढ़ में नर्सिंग की पढ़ाई पूरी कर चुकी लगभग दो हजार छात्राएं फिलहाल नौकरी पाने से वंचित हैं। वजह यह है कि उनका पंजीयन अब तक छत्तीसगढ़ नर्सिंग काउंसिल में नहीं हो पाया है। पंजीयन की प्रक्रिया पिछले कई महीनों से लंबित होने के कारण ये छात्राएं न तो शासकीय अस्पतालों में भर्ती के लिए पात्र बन पा रही हैं और न ही निजी अस्पतालों में नियमित रूप से सेवाएं दे पा रही हैं। इस पूरे मामले को लेकर विभागीय कामकाज की धीमी गति पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक इन छात्राओं ने करीब छह महीने पहले नर्सिंग काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन किया था। नियमों के अनुसार नर्सिंग की डिग्री या डिप्लोमा हासिल करने के बाद किसी भी अस्पताल में सेवा देने से पहले काउंसिल में पंजीयन होना अनिवार्य होता है। लेकिन लंबित प्रक्रिया के कारण इन छात्राओं का पंजीयन अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
बताया जा रहा है कि राज्य में स्वास्थ्य विभाग शासकीय अस्पतालों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए बड़े स्तर पर भर्ती की तैयारी कर रहा है। ऐसे समय में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित नर्सिंग छात्राएं केवल पंजीयन के अभाव में भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र नहीं बन पा रही हैं। इससे उनके करियर पर भी असर पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार पंजीयन की प्रक्रिया इसलिए अटकी हुई है क्योंकि आवेदन पर अंतिम अनुमोदन और हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। छात्राओं का कहना है कि वे कई बार नर्सिंग काउंसिल के कार्यालय के चक्कर लगा चुकी हैं, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट या संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया है। इस मुद्दे को लेकर प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज एसोसिएशन ने भी काउंसिल के अध्यक्ष से हस्तक्षेप करने की मांग की है।
दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पंजीयन प्रक्रिया में देरी जांच के कारण हो रही है। संचालक स्वास्थ्य सेवाएं और छत्तीसगढ़ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के अध्यक्ष संजीव झा ने बताया कि आवेदनों के साथ कॉलेज और पढ़ाई से जुड़े दस्तावेजों की मांग की गई है। उनका कहना है कि आवेदन की प्रक्रिया छह महीने पहले नहीं बल्कि करीब एक महीने पहले पूरी हुई है। दस्तावेजों की जांच इसलिए की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पढ़ाई और प्रशिक्षण सही तरीके से हुआ है, क्योंकि पहले भी कुछ गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई थीं।
उन्होंने बताया कि सभी आवेदनों की जांच के लिए एक समिति बनाई गई है। समिति दस्तावेजों की जांच करेगी और जो आवेदन पूरी तरह सही पाए जाएंगे, उन पर हस्ताक्षर कर पंजीयन प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
इस बीच नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने नर्सिंग कॉलेजों को भी निर्देश जारी किए हैं। काउंसिल ने सभी नर्सिंग कॉलेजों को स्मरण पत्र भेजते हुए कहा है कि उन्हें भारतीय उपचर्या परिषद (आईएनसी) से छह महीने के भीतर उपयुक्तता प्राप्त करना अनिवार्य होगा। काउंसिल की रजिस्ट्रार दुर्गा कुंजाम के अनुसार, छत्तीसगढ़ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल से मान्यता मिलने के छह महीने के भीतर भारतीय उपचर्या परिषद से उपयुक्तता प्रमाण पत्र प्राप्त करना जरूरी होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कॉलेज निर्धारित समय सीमा के भीतर उपयुक्तता प्राप्त नहीं करते या उसका प्रमाण काउंसिल को प्रस्तुत नहीं करते, तो उन्हें आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में प्रवेश प्रक्रिया के लिए मान्यता नहीं दी जाएगी।
इस पूरे मामले ने नर्सिंग शिक्षा और प्रशासनिक प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए भर्ती की तैयारी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशिक्षित नर्सिंग छात्राएं पंजीयन की देरी के कारण रोजगार के अवसर से वंचित हो रही हैं।