बाजार की गिरावट में घबराएं नहीं म्यूचुअल फंड निवेशक, एक्सपर्ट्स ने बताई सबसे आम गलतियां

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शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर निवेशकों की असली परीक्षा होता है। खासकर म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वाले निवेशक ऐसे समय में अक्सर घबरा जाते हैं और जल्दबाजी में फैसले ले बैठते हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की अस्थिरता के दौरान की गई छोटी-छोटी गलतियां लंबे समय में निवेशकों के रिटर्न पर बड़ा असर डाल सकती हैं।

निवेश के बारे में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री Paul Samuelson ने कहा था कि निवेश ऐसा होना चाहिए जैसे आप पेंट को सूखते या घास को उगते हुए देख रहे हों। यानी इसमें धैर्य और अनुशासन सबसे जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति निवेश में रोमांच ढूंढ रहा है, तो वह निवेश नहीं बल्कि जोखिम भरा खेल खेल रहा है।

आज के समय में वैश्विक परिस्थितियां भी बाजार को प्रभावित करती हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बड़े देशों की नीतियों में बदलाव जैसे कारणों से बाजार में अचानक गिरावट या तेजी देखने को मिलती है। ऐसे हालात में कई निवेशक घबराकर ऐसे फैसले ले लेते हैं जो बाद में नुकसानदायक साबित होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ी गलती पैनिक सेलिंग यानी घबराकर निवेश बेच देना है। जब बाजार गिरता है और पोर्टफोलियो की वैल्यू कम होती दिखती है तो कई निवेशक नुकसान से बचने के लिए अपने म्यूचुअल फंड यूनिट्स तुरंत रिडीम कर लेते हैं। लेकिन इतिहास बताता है कि इक्विटी बाजार समय के साथ फिर से उभरते हैं और धैर्य रखने वाले निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलता है।

दूसरी आम गलती बार-बार फंड बदलना है। बाजार में थोड़ी हलचल होते ही कई लोग एक फंड से पैसा निकालकर दूसरे फंड या सेक्टर में निवेश करने लगते हैं। इस प्रक्रिया में अक्सर निवेशक लंबी अवधि की रणनीति से भटक जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश करते समय तय की गई एसेट एलोकेशन रणनीति को बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।

उदाहरण के लिए यदि किसी निवेशक ने अपने पोर्टफोलियो में 70 प्रतिशत इक्विटी और 30 प्रतिशत डेट का संतुलन तय किया है, तो उसे उसी अनुपात को बनाए रखना चाहिए। बार-बार बदलाव करने से जोखिम बढ़ सकता है और निवेश का उद्देश्य भी प्रभावित हो सकता है।

तीसरी बड़ी गलती बाजार गिरने पर एसआईपी बंद कर देना है। कई लोग जब बाजार में गिरावट देखते हैं तो अपनी सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP रोक देते हैं। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार गिरने के समय निवेश करने से कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। इससे लंबे समय में औसत लागत कम होती है और बेहतर रिटर्न की संभावना बढ़ जाती है।

कई निवेशक बाजार को टाइम करने की कोशिश भी करते हैं। वे सोचते हैं कि अभी बाजार और गिरेगा, इसलिए पैसा निकालकर बाद में सस्ते दाम पर निवेश करेंगे। लेकिन वास्तविकता यह है कि बाजार का सही समय पकड़ना बेहद मुश्किल होता है। अधिकतर मामलों में निवेशक कम कीमत पर बेच देते हैं और बाद में ऊंचे दाम पर खरीद लेते हैं।

इसके अलावा पोर्टफोलियो का समय-समय पर रीबैलेंस न करना भी एक बड़ी गलती है। बाजार के उतार-चढ़ाव से इक्विटी और डेट का संतुलन बदल सकता है, इसलिए नियमित अंतराल पर पोर्टफोलियो की समीक्षा कर उसे संतुलित करना जरूरी होता है।

विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को सही मायनों में डाइवर्सिफाइड रखना चाहिए। कई बार लोग खुद को विविध निवेश वाला मानते हैं, लेकिन उनका पैसा कुछ ही सेक्टर या निवेश शैली में केंद्रित होता है। ऐसे में जोखिम बढ़ जाता है। बेहतर यह है कि निवेश को अलग-अलग सेक्टर, कंपनियों और एसेट क्लास में फैलाकर रखा जाए।

कुल मिलाकर बाजार की अस्थिरता के समय घबराने के बजाय धैर्य बनाए रखना, तय रणनीति पर टिके रहना और लंबी अवधि का नजरिया अपनाना ही म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए सबसे बेहतर रणनीति माना जाता है।

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