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गढ़ कलेवा की स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं : पारंपरिक व्यंजनों से बन रहीं आत्मनिर्भर, पूरी जिम्मेदारी के साथ कर रहीं संचालन

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बलौदाबाजार – अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज हम आपको ऐसी महिलाओं से रूबरू करा रहे हैं, जो आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देने के लिए बलौदा बाजार में संचालित गढ़ कलेवा केंद्र में महिलाएं पूरी जिम्मेदारी के साथ इसका संचालन कर रही हैं।  यहां महिलाएं अपने हाथों से छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजन तैयार कर लोगों को परोसती हैं। इससे एक ओर प्रदेश की संस्कृति और स्वाद को नई पहचान मिल रही है, तो वहीं दूसरी ओर महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बन रही हैं।

पारंपरिक व्यंजन जैसे फरा, खुरमी, चीला, अंगाकर रोटी सहित कई पकवान 
बलौदाबाजार जिले में गढ़ कलेवा केंद्र का संचालन पिछले तीन वर्षों से अर्चना ठाकुर कर रही हैं। उनके साथ करीब 20 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो पूरी मेहनत और लगन से यहां काम कर रही हैं। ये महिलाएं छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजन जैसे फरा, खुरमी, चीला, अंगाकर रोटी, सोहारी सहित कई तरह के पकवान तैयार कर लोगों को परोसती हैं। यहां आने वाले लोग इन पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेते हैं और प्रदेश की संस्कृति से भी रूबरू होते हैं। सिर्फ यही नहीं, स्व-सहायता समूह की ये महिलाएं अचार, बड़ी, बिजौरी और पापड़ भी तैयार करती हैं, जिन्हें बाजार में बेचा जाता है। इससे इन महिलाओं को अतिरिक्त आय भी प्राप्त हो रही है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। 

अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़ना का उद्देश्य
गढ़ कलेवा की संचालिका और स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष अर्चना ठाकुर बताती हैं कि, उनका उद्देश्य अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़ना है। इसी दिशा में अब वे एक नई पहल भी शुरू कर रही हैं। प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से वे ऐसी महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की योजना बना रही हैं, जो अपने हुनर और अनुभव के आधार पर नौकरी की तलाश में हैं। छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से गढ़ कलेवा में स्व-सहायता समूह की महिलाओं को अपना व्यवसाय चलाने का अवसर मिल रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।

रोजगार समाज में नई पहचान और सम्मान
यह पहल न सिर्फ महिलाओं को रोजगार दे रही है, बल्कि उन्हें समाज में नई पहचान और सम्मान भी दिला रही है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह प्रयास एक प्रेरणादायक उदाहरण बनता जा रहा है। महिला दिवस के मौके पर इन महिलाओं की कहानी यह संदेश देती है कि अगर अवसर और हौसला मिले, तो महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।

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