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छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों में एक साल में 6,728 मौतें:2025 में 15,318 रोड एक्सीडेंट, नक्सल प्रभावित इलाकों में भी बढ़ीं दुर्घटनाएं

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छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। हर साल हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवा रहे हैं। ताजा सरकारी आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में हादसों की संख्या बढ़ी है, कई जिलों में मौतों का आंकड़ा भी बढ़ा है।

जिन इलाकों को कभी नक्सल हिंसा के लिए जाना जाता था, वहां अब सड़क हादसे भी बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में छत्तीसगढ़ में कुल 14,857 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थी।

जो कि साल 2025 में बढ़कर 15,318 हो गई। यानी एक साल में 461 हादसों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हादसों के साथ घायलों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। 2024 में 12,484 और 2025 में 13,135 घायल हुए हैं।

मौतों में मामूली कमी, संख्या अब भी बड़ी

मौतों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2024 में 6,945 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई थी। साल 2025 में 6,728 लोगों की जान गई।

कई जिलों में मौतों का आंकड़ा बढ़ा

प्रदेश के कई जिलों में सड़क हादसों में मौतों की संख्या बढ़ी है। कुछ जिलों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक हो गई है।

  • महासमुंद: मौतें 16 प्रतिशत बढ़ीं
  • कबीरधाम: मौतें 32 प्रतिशत बढ़ीं
  • कांकेर: मौतें 11 प्रतिशत बढ़ीं
  • सुकमा: मौतें 54 प्रतिशत बढ़ीं

दंतेवाड़ा में सड़क हादसों में घायल होने वालों की संख्या 115 प्रतिशत तक बढ़ गई। यानी जिन क्षेत्रों को लंबे समय तक नक्सल हिंसा के लिए जाना जाता था, वहां अब सड़क हादसे भी लोगों की जान ले रहे हैं।

हादसों के पीछे कई बड़ी वजह

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में बढ़ते सड़क हादसों के पीछे कई गंभीर कारण हैं। इनमें सड़क इंजीनियरिंग की खामियां और ट्रैफिक नियमों के पालन में कमी प्रमुख हैं।

मुख्य कारण

  • कई हाईवे और सड़कों पर अंधे मोड़
  • संकेतक बोर्ड की कमी
  • गड्ढों से भरी सड़कें
  • खराब मेंटेनेंस
  • कई जगह स्ट्रीट लाइट का अभाव
  • रात में दुर्घटनाओं का ज्यादा खतरा
  • ओवरलोडिंग पर नियंत्रण नहीं
  • स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम बड़े शहरों तक सीमित

प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के कई ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। कई जगह इनको सुधारने का काम अब भी शुरू नहीं हुआ या अधूरा पड़ा है।

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