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अब तीसरा खेत:किराए की जमीन पर 2 करोड़ की अफीम

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बलरामपुर जिले में तीन दिन में अफीम की खेती का दूसरा मामला सामने आया है। कुसमी विकासखंड में झारखंड सीमा से लगे करौंधा थाना क्षेत्र के खजुरी पंचायत के तुर्रापानी गांव में भी अफीम की खेती का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने गुरुवार को यहां से करीब 2 करोड़ कीमत के 18 क्विंटल अफीम के पौधे जब्त किए हैं। मामले में दो ग्रामीण सहादुर और टुइयां को हिरासत में लिया गया है।

घने जंगल और पहाड़ों से घिरे दुर्गम इलाके में अफीम की खेती की गई ​थी। हिरासत में लिया गया ग्रामीण सहादुर जमीन मालिक है। वहीं ग्रामीण टुइयां ने गांव के ही एक व्यक्ति से मसाले की खेती के लिए 6 हजार रुपए में खेत किराए पर लिया था।

इसे उसने अफीम की खेती के लिए दे दिया था। गुरुवार को पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सुबह से ही गांव में डेरा डाले हुए थे। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में अफीम की फसल को उखड़ने की कार्रवाई की गई। जांच में सामने आया कि यहां भी अफीम की रखवाली के लिए बाहरी लोगों को लगाया गया था। वे खेत के पास झोपड़ी बनाकर रहते थे।

हालांकि कार्रवाई की भनक लगते ही सभी फरार हो गए। ग्रामीणों के अनुसार दो दिन पहले तक वे यहीं मौजूद थे और तस्कर भी पहुंचा था। माना जा रहा है कि दो दिन पहले त्रिपुरी में अफीम की खेती का खुलासा होने के बाद तस्कर और रखवाली करने वाले भाग गए। यहां खेतों की सिंचाई के लिए पहाड़ से आने वाले प्राकृतिक जल स्रोत का इस्तेमाल किया जा रहा था। पहाड़ी से तराई तक लंबी पाइपलाइन बिछाकर पानी खेतों तक पहुंचाया गया था।

झारखंड के लोगों ने लिए थे किराए पर खेत जिस जमीन पर खेती की गई है, वह स्थानीय लोगों की है। इसे किराए पर लिया गया था। ग्रामीणों के अनुसार उन्हें नहीं पता था कि यहां अफीम की खेती की जा रही है। तस्करों ने मसाले की खेती के नाम पर जमीन ली थी। पुलिस जांच कर रही है कि खेत किसने किराए पर लिए और नेटवर्क के पीछे कौन लोग शामिल हैं। ग्रामीणों के अनुसार चार तस्कर बारी-बारी से आते थे, जो खुद को झारखंड के चतरा का रहने वाला बताते थे। इसमें एक का नाम भूपेंद्र उरांव है।

दोनों जगहों पर एक ही तस्कर कर रहा था खेती बलरामपुर एसपी वैभव बैंकर के अनुसार पुलिस, राजस्व व वन विभाग की टीम लगातार सर्चिंग अभियान चलाकर गांवों में जांच कर रही थी। इस दौरान सूचना मिली कि खजुरी पंचायत में भी अफीम की खेती की गई है। इस पर टीम ने कार्रवाई शुरू की। दोनों मामलों में एक ही तस्कर के शामिल होने की बात कही जा रही है, जिसकी जांच की जा रही है। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अफीम की अवैध खेती, सीएम ने सभी कलेक्टरों से 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

प्रदेश में अवैध रूप से अफीम की खेती के मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि 15 दिन के भीतर प्रमाण पत्र सहित विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को पेश करें। राज्य में अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन और कारोबार के प्रति सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है और ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सभी जिला कलेक्टरों को सर्वे कर जांच रिपोर्ट तैयार करेंगे।

दुर्ग: खेत में अफीम थी, अफसर बताते रहे मक्का, प्रोत्साहन राशि भी दी; 3 को नोटिस

दुर्ग के समोदा गांव में बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार के खेत में अफीम की खेती करने के मामले में कलेक्टर अभिजीत सिंह ने पटवारी अनिता साहू, कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू और सर्वेयर शशिकांत साहू को नोटिस जारी किया गया है। उनके जवाब आने के बाद उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।

तीनों की लापरवाही सामने आने के बाद नोटिस देकर जबाव मांगा गया है। सबसे बड़ी गड़बड़ी ​कृषि विस्तार अधिकारी की सामने आई है। जब दस्तावेजों की जांच की गई तो पता चला कि कृषि विस्तार अधिकारी ने बीजेपी नेता के भाई विमल ताम्रकार के जिस जमीन को प्रदर्शन प्लाट बनाया है, वहां मक्के के स्थान पर धान लगी हुई है।

वहां मक्के का प्रदर्शन करने का दावा कर बीजेपी नेता के भाई को राज्य सरकार के मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी दे दी गई। यह भी पता चला है कि इस जमीन पर निजी बैंक से लोन भी लिया गया है।

धान के खेत की फोटो अपलोड करने की बजाय मक्के की खेत के पास एक ग्रामीण को खड़ा करके फोटो खींची गई। नियमत: प्रदर्शन प्लाट पर उसी किसान को खड़ा करके फोटो खींचना है जिसे सरकारी लाभ मिलना है। जिस मक्के की फोटो रिपोर्ट में लगाई गई है वहां से करीब सौ मीटर की दूरी पर बीजेपी नेता अफीम की खेती कर रहा था।

कलेक्टर अभिजीत सिंह ने पटवारी अनीता साहू, सर्वेयर शशिकांत साहू और कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को नोटिस जारी किया है। कलेक्टर के मुताबिक तीनों कर्मचारियों से जबाव मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे समझिए… किस अधिकारी की क्या जिम्मेदारी थी

सर्वेयर: सर्वेयर ने सिंतबर-2025 में बीजेपी नेता के खेत का डिजीटल सर्वे किया था। इसके बाद उसने फोटो गिरदावरी को सॉफ्टवेयर पर अपलोड किया। इसमें उसने खसरा नंबर 309 को पड़त भूमि और खसरा नंबर 310 में धान की फसल लगे होने की जानकारी अपलोड की। इन्हीं दोनों जमीन पर अफीम की फसल मिली है।

पटवारी ने बिना जांचे दी रिपोर्ट: सर्वेयरों ने ₹10 प्रति खसरा की दर से रिपोर्ट तैयार की। पटवारी अनिता साहू को मौके पर सत्यापन करना था, पर बिना जांचे डेटा अप्रूव किया। आशंका है कि बीजेपी नेता ने सांठगांठ कर मनमाफिक रिपोर्ट अपलोड कराई। इससे अफीम की खेती छिपी रही।

कृषि विस्तार अधिकारी की मिलीभगत: अधिकारी एकता साहू ने बिना सूचना बोर्ड के दुर्गम प्रदर्शन प्लॉट चुना, जहां सामान्य किसान का पहुंचना असंभव है। 6 फरवरी के निरीक्षण के एक माह बाद वहां अफीम मिली। उपसंचालक ने 5 बिंदुओं पर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है।

भूपेश ने कहा– अपने क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन चलाएं कांग्रेसी, पुलिस को बताएं

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में अफीम की खेती को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में बघेल ने भाजपा सरकार पर अफ़ीम की खेती को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दुर्ग और बलरामपुर जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अफ़ीम की बरामदगी प्रदेश के लिए चिंताजनक है।

बघेल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और लोगों से अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के खेतों में सतर्कता बरतें और स्वयं ‘सर्च ऑपरेशन’ चलाएं। यदि कहीं भी अफ़ीम की खेती दिखाई दे, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें और साक्ष्यों के साथ जानकारी कांग्रेस पार्टी तक भी पहुंचाएं।

बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ को ‘सूखे नशे का अड्डा’ बनने से बचाने के लिए जनता को आगे आना होगा।

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