देश की प्रमुख सरकारी योजना प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए कुछ अहम आंकड़े सामने आए हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि योजना के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन तो दिए गए, लेकिन बड़ी संख्या में लाभार्थी सिलेंडर रिफिल नहीं करा पा रहे हैं।
योजना शुरू होने के बाद तेजी से बढ़ा LPG कवरेज
मई 2016 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को धुएं वाले पारंपरिक चूल्हों से मुक्ति दिलाकर स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना था। योजना लागू होने के बाद देश में एलपीजी कवरेज तेजी से बढ़ा और अप्रैल 2019 तक लगभग सभी घरों तक पहुंच गया। हालांकि, योजना के कई बीपीएल लाभार्थियों ने आर्थिक कारणों से शुरुआती रिफिल के बाद गैस का उपयोग जारी नहीं रखा।
RTI में सामने आए आंकड़े
आरटीआई कार्यकर्ता डॉ विवेक पांडे द्वारा दायर आवेदन के जवाब में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और पेट्रोलियम मंत्रालय से जानकारी मिली कि पिछले पांच वर्षों में उज्ज्वला योजना पर ₹17,522 करोड़ से अधिक खर्च किए गए। सरकार ने इस योजना के माध्यम से करोड़ों गरीब परिवारों को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराए, ताकि स्वच्छ ईंधन का उपयोग बढ़ सके।
5 साल में 3.46 करोड़ लोगों ने नहीं कराया रिफिल
RTI के अनुसार वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कुल 3,46,45,284 उज्ज्वला लाभार्थियों ने LPG सिलेंडर रिफिल नहीं कराया।
वर्षवार आंकड़े
- 2020-21: 4,51,872
- 2021-22: 66,96,669
- 2022-23: 87,07,644
- 2023-24: 92,01,015
- 2024-25: 95,88,084
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हर साल बड़ी संख्या में लाभार्थी गैस सिलेंडर का दोबारा उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
मध्य प्रदेश में भी बड़ी संख्या
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में करीब 38,39,004 उज्ज्वला लाभार्थियों ने पिछले पांच वर्षों में LPG सिलेंडर रिफिल नहीं कराया। यह दर्शाता है कि प्रदेश में भी कई गरीब परिवार नियमित रूप से गैस सिलेंडर का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
इन राज्यों में सबसे ज्यादा मामले
RTI डेटा के अनुसार जिन राज्यों में सबसे अधिक लाभार्थियों ने LPG रिफिल नहीं कराया, उनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ राज्य के लाभार्थियों शामिल हैं।
उठ रहे कई सवाल
एलपीजी सिलेंडर की कीमत और गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति इसके पीछे मुख्य कारण माना जा रहा हैं। कई परिवारों के लिए गैस सिलेंडर रिफिल कराना अभी भी महंगा साबित हो रहा है।