राज्य के सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से ही योग की पढ़ाई होगी। वैदिक गणित को पाठ्यक्रम में जोड़ा जाएगा। स्कूलों में आखिरी पीरियड अनिवार्य रूप से खेल का होगा। विधानसभा में शुक्रवार को स्कूल शिक्षा विभाग का 22466 करोड़ रुपए का बजट ध्वनिमत से पास हो गया। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि यह बजट राज्य में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि पीएम श्री योजना के अंतर्गत स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इस योजना के लिए बजट में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन स्कूलों में ग्रीन स्कूल, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, आधुनिक प्रयोगशालाएं, खेल सुविधाएं और कैरियर काउंसिलिंग जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही शिक्षकों को उच्च शिक्षण संस्थानों के माध्यम से प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
उत्कृष्ट स्कूलों के लिए 100 करोड़ का प्रावधान स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश में 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना होगी। इन विद्यालयों के लिए बजट में 100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। ये स्कूल प्रत्येक ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होंगे, जिससे ग्रामीण विद्यार्थियों को उच्च स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
नवा रायपुर में बनेगा प्रशासनिक भवन स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षा विभाग के प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए नवा रायपुर में विभाग का एक आधुनिक प्रशासनिक कॉम्पोजिट भवन बनाया जाएगा। इसके लिए प्रारंभिक रूप से 5 करोड़ 90 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इस भवन में लोक शिक्षण संचालनालय, समग्र शिक्षा, संस्कृत विद्या मंडल, मदरसा बोर्ड, माध्यमिक शिक्षा मंडल सहित कई कार्यालय संचालित होंगे।
सभी दस्तावेजों पर क्यूआर कोड, टीसी भी ऑनलाइन स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि विद्यार्थियों को शैक्षणिक दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत छात्रों की मार्कशीट और ट्रांसफर सर्टिफिकेट को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। नई व्यवस्था में दस्तावेज पर क्यूआर कोड और यूनिक आईडी दी जाएगी, जिसके जरिए उनकी डिजिटल सत्यता की जांच की जा सकेगी।
भास्कर एक्सक्लूसिव
तीसरी के बच्चों की परीक्षा अब पेन-कागज पर नहीं, टैबलेट पर होगी
तीसरी कक्षा के बच्चों की बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान की परीक्षा अब पेन- कागज नहीं, बल्कि टैबलेट पर ली जाएगी। शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए सीबीएसई ने फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी का निर्णय लिया है। अब तक यह ओएमआर शीट पर होती थी।
एनसीईआरटी की इकाई परख मार्च के अंत में यह महा-सर्वेक्षण आयोजित करने जा रही है। सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों के प्राचार्यों को इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है। केंद्र सरकार इसके जरिए देश के कोने-कोने में तीसरी कक्षा में पढ़ रहे बच्चों के शिक्षा के स्तर को मापना चाहती है। इस अभियान के तहत देशभर 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी 776 जिलों के करीब 10 हजार से अधिक सरकारी, अनुदान प्राप्त और निजी स्कूल शामिल है। एक लाख से अधिक छात्र इस प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।
स्कूलों का इसका पालन करना अनिवार्य सीबीएसई ने निर्देश दिए हैं कि जिन स्कूलों का चयन सैंपलिंग के आधार पर हुआ है, उन्हें सर्वे की निर्धारित तारीखों पर स्कूलों का चालू रहना और छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करना जरूरी है। सर्वे के लिए आने वाली टीमों को पूरा प्रशासनिक और तकनीकी सहयोग देना होगा।
एनसीईआरटी कर रहा मार्गदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर एनसीईआरटी परख के सर्वे के लिए तकनीकी मार्गदर्शन दे रहा है। वहीं राज्यों में समग्र शिक्षा, एससीईआरटी, डाइट और जिला शिक्षा कार्यालयों को इसके कार्यान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अब तक ओएमआर शीट पर हुई थी परीक्षा साल 2022 में हुए पिछले सर्वे में ओएमआर शीट का इस्तेमाल किया गया था। अब सीबीएसई ने कहा है कि वर्ष 2026 का यह सर्वे पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगा। सीबीएसई के अनुसार डिजिटल मोड से न केवल डेटा की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि रिजल्ट तैयार करने में भी समय की बचत होगी। इससे सटीक रिपोर्ट जल्द मिल सकेगी।