इलेक्ट्रिक वाहनों की वैश्विक रफ्तार पर ब्रेक लगता नजर आ रहा है। फरवरी 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में EV की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे इस तेजी से बढ़ते सेक्टर में चिंता बढ़ गई है। Benchmark Mineral Intelligence के अनुसार, फरवरी में ग्लोबल ईवी रजिस्ट्रेशन करीब 11% घटकर लगभग 10 लाख के आसपास रह गया, जो पिछले दो वर्षों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
सबसे बड़ा झटका दुनिया के सबसे बड़े EV बाजार China में देखने को मिला। यहां बैटरी इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों की बिक्री में सालाना आधार पर करीब 32% की गिरावट आई और कुल आंकड़ा 5 लाख से नीचे आ गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकारी सब्सिडी और टैक्स छूट खत्म होने, बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कीमतों की जंग ने मांग को कमजोर कर दिया है। जैसे ही सरकारी सपोर्ट कम हुआ, ग्राहकों की खरीदारी पर सीधा असर दिखने लगा।
सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि United States समेत पूरे उत्तरी अमेरिका में भी EV की मांग कमजोर पड़ी है। यहां फरवरी में बिक्री करीब 35% गिरकर 90,000 यूनिट से भी नीचे आ गई। इसके पीछे टैक्स क्रेडिट स्कीम का खत्म होना और उत्सर्जन मानकों में संभावित ढील जैसे नीतिगत बदलाव बड़ी वजह माने जा रहे हैं। इन फैसलों का असर कंपनियों पर भी पड़ा है, जहां अरबों डॉलर का मूल्यह्रास दर्ज किया गया है।
हालांकि हर जगह स्थिति नकारात्मक नहीं है। Europe में फरवरी के दौरान EV बिक्री में 21% की बढ़त दर्ज की गई, भले ही इसकी गति पहले जैसी तेज नहीं रही। इसके अलावा एशिया के अन्य देशों, ऑस्ट्रेलिया और कुछ उभरते बाजारों में EV की मांग तेजी से बढ़ती नजर आ रही है, जहां कुल रजिस्ट्रेशन में 78% तक की वृद्धि देखी गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में EV बाजार की दिशा पूरी तरह तीन बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करेगी—सरकारी नीतियां और सब्सिडी, बैटरी तकनीक और लागत, और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार। अगर इन क्षेत्रों में सुधार होता है, तो EV सेक्टर फिर से तेजी पकड़ सकता है।
कुल मिलाकर, फिलहाल EV मार्केट एक ट्रांजिशन फेज से गुजर रहा है, जहां सरकारी समर्थन कम होते ही मांग पर असर साफ दिखाई दे रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले महीनों में यह सेक्टर फिर रफ्तार पकड़ता है या नहीं।