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विधानसभा में साय का कांग्रेस पर हमला, ‘5 साल का कुशासन’ बता घेरा विपक्ष

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कांग्रेस सरकार के पिछले कार्यकाल को कठघरे में खड़ा कर दिया। सदन में सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पांच साल के शासन को याद करते ही जनता के साथ हुए अन्याय और अव्यवस्थाओं की तस्वीर सामने आ जाती है। उनके शब्दों में, ऐसा कोई वर्ग नहीं बचा जिसे उस दौर में ठगा न गया हो।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की कई योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह गईं और जमीनी स्तर पर उनका कोई असर नजर नहीं आया। उन्होंने खास तौर पर नरवा, गरवा, घुरुवा, बारी योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इन योजनाओं का हाल जनता भली-भांति जानती है। गौठानों की स्थिति पर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि वहां जनता के पैसे का दुरुपयोग हुआ, जबकि जमीनी हकीकत बेहद खराब थी।

साय ने आबकारी विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए भी कांग्रेस सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जहां पिछली सरकार के समय राजस्व करीब 5100 करोड़ रुपए था, वहीं वर्तमान सरकार में यह बढ़कर 11 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले व्यवस्था भ्रष्टाचार से ग्रस्त थी और शराब व्यवस्था को गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता था।

सदन में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के मुद्दे पर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि सरकार ने मार्च तक माओवादी गतिविधियों को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है और हाल ही में बड़ी संख्या में माओवादियों के आत्मसमर्पण को उन्होंने सुरक्षा बलों की सफलता और जनता के भरोसे का परिणाम बताया।

खनिज और DMF फंड को लेकर भी उन्होंने पिछली सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि ट्रांजिट पास में छेड़छाड़ कर बड़े स्तर पर पैसे का खेल किया गया और DMF फंड के उपयोग में भी पारदर्शिता की कमी रही। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार इन सभी क्षेत्रों में पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री के विभागों की अनुदान मांगें विपक्ष की गैरमौजूदगी में पारित हो गईं। वित्त मंत्री OP Choudhary ने विनियोग विधेयक पेश किया, जिसके बाद सदन की कार्यवाही अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

कुल मिलाकर, विधानसभा का यह सत्र राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सरकार की नीतियों और पिछली व्यवस्था पर तीखी बहस का गवाह बना, जहां सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव खुलकर सामने आया।

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