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LPG संकट की आहट: खपत घटी, पेट्रोल-डीजल की मांग बढ़ी, खाने पर महंगाई की मार

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मार्च के पहले हफ्ते में देश की ऊर्जा खपत के आंकड़ों ने एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। जहां एक तरफ LPG की खपत में तेज गिरावट दर्ज की गई, वहीं पेट्रोल और डीजल की मांग में बढ़ोतरी देखने को मिली। यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आम आदमी की थाली और जेब दोनों पर दिखाई देने लगा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च के शुरुआती सप्ताह में LPG की खपत 17% घटकर 1.147 मिलियन टन रह गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 1.387 मिलियन टन थी। फरवरी के पहले पखवाड़े की तुलना में भी इसमें 26% से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। इसके उलट पेट्रोल की बिक्री 13% बढ़कर 1.5 मिलियन टन और डीजल की खपत 8% बढ़कर 3.384 मिलियन टन तक पहुंच गई। यह साफ संकेत है कि ऊर्जा उपभोग का पैटर्न तेजी से बदल रहा है।

इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह वेस्ट एशिया में बने युद्ध जैसे हालात माने जा रहे हैं, जिसने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसका अधिकांश हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है। ऐसे में वहां तनाव बढ़ते ही सप्लाई पर दबाव आना स्वाभाविक है। हालांकि सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि देश में LPG की कोई कमी नहीं है और सप्लाई सामान्य बनी हुई है।

लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों और सप्लाई में दिक्कतों ने होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया है। एक सर्वे के अनुसार, देशभर में 57% रेस्टोरेंट्स और 54% स्ट्रीट वेंडर्स ने अपने खाने के दाम बढ़ा दिए हैं। यानी गैस की महंगाई सीधे ग्राहकों की प्लेट तक पहुंच चुकी है।

हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई जगहों पर वेंडर्स को ब्लैक मार्केट से महंगे दामों पर गैस खरीदनी पड़ रही है। कुछ रेस्टोरेंट्स ने तो बिल में ‘एलपीजी रिवीजन चार्ज’ तक जोड़ना शुरू कर दिया है। बड़े शहरों में होटल अपने काम के घंटे कम कर रहे हैं और छोटे शहरों में कई ठेले-रेहड़ी वालों ने अस्थायी रूप से काम बंद कर दिया है। मजबूरी में कई लोग अब लकड़ी, कोयले या इंडक्शन जैसे विकल्पों की ओर लौट रहे हैं।

इस बीच सरकार ने सख्ती दिखाते हुए कालाबाजारी और जमाखोरी पर बड़ा अभियान चलाया है। अब तक 12 हजार से ज्यादा छापेमारी की जा चुकी है और 15 हजार से अधिक सिलेंडर जब्त किए गए हैं। साथ ही राज्यों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सरकार शहरी क्षेत्रों में कमर्शियल यूजर्स को PNG अपनाने के लिए भी प्रेरित कर रही है ताकि LPG पर दबाव कम किया जा सके।

डिजिटल सिस्टम को मजबूत करने के तहत LPG की ऑनलाइन बुकिंग अब 94% तक पहुंच चुकी है, जबकि रिफाइनरियों में उत्पादन भी 38% तक बढ़ाया गया है। इसके बावजूद बाजार में जो असंतुलन दिख रहा है, वह यह संकेत देता है कि सप्लाई और डिमांड के बीच तालमेल अभी भी पूरी तरह नहीं बैठ पाया है।

इसी बीच राहत की खबर भी सामने आई है। भारत के ‘नंदा देवी’ और ‘शिवालिक’ जैसे जहाज बड़ी मात्रा में LPG लेकर देश के पोर्ट्स तक पहुंच चुके हैं। नंदा देवी जहाज करीब 46,500 मीट्रिक टन LPG लेकर गुजरात के वडिनार पोर्ट पहुंचा, जबकि शिवालिक जहाज मुंद्रा पोर्ट पर पहले ही गैस पहुंचा चुका है। इससे आने वाले दिनों में सप्लाई में कुछ सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

सरकार ने e-KYC को लेकर फैल रही अफवाहों पर भी सफाई दी है। मंत्रालय के अनुसार, सभी उपभोक्ताओं के लिए e-KYC अनिवार्य नहीं है, बल्कि सिर्फ उन्हीं के लिए जरूरी है जिनका वेरिफिकेशन अधूरा है। इसका मकसद सिर्फ सिस्टम को पारदर्शी बनाना है, न कि किसी का कनेक्शन बंद करना।

कुल मिलाकर, LPG को लेकर बनी यह स्थिति केवल एक अस्थायी संकट नहीं बल्कि एक बड़ा संकेत है कि वैश्विक घटनाओं का असर अब सीधे भारत के आम उपभोक्ता तक पहुंच रहा है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, यह काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और सरकार की रणनीति पर निर्भर करेगा।

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