छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पहुंचे अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक कार्यक्रम के दौरान तीखा बयान देकर राजनीतिक माहौल गरमा दिया। उन्होंने योगी आदित्यनाथ पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वे “असली हिंदू नहीं हैं” और खुद को साबित करने में असफल रहे हैं।
अपने संबोधन में शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि उनकी आवाज दबाने के लिए सत्तारूढ़ दल हिस्ट्रीशीटरों का इस्तेमाल कर रहा है। उनका कहना था कि मुद्दों पर संवाद करने के बजाय विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।
इस दौरान उन्होंने University Grants Commission (UGC) के नए नियमों पर भी कड़ा विरोध जताया। उन्होंने इन नियमों को “हिंदुओं को बांटने वाला” बताते हुए यहां तक कह दिया कि यह राष्ट्रहित के खिलाफ है और इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे प्रावधान समाज में विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं।
शंकराचार्य ने सनातन धर्म को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि इसे बाहरी ताकतों से नहीं, बल्कि भीतर मौजूद “कालनेमियों” से खतरा है। उन्होंने संकेत दिया कि धर्म और राजनीति के नाम पर स्वार्थ साधने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
UGC नियमों को लेकर विवाद का एक बड़ा पक्ष सवर्ण वर्ग के छात्रों और शिक्षकों की आपत्तियों से जुड़ा है। उनका कहना है कि नए नियमों में झूठी शिकायतों पर दंड का प्रावधान हटाना और जनरल कैटेगरी को सूची से बाहर रखना भविष्य में विवाद और दुरुपयोग की स्थिति पैदा कर सकता है।
कुल मिलाकर, बिलासपुर में दिया गया यह बयान न केवल धार्मिक बल्कि राजनीतिक बहस को भी तेज कर गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।