आदि शक्ति की उपासना का पावन पर्व चैत्र नवरात्र इस वर्ष गुरुवार से पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ प्रारंभ हो रहा है। माता के आगमन के साथ ही सनातन धर्मावलंबी हिंदू नववर्ष का स्वागत करेंगे और नौ दिनों तक पूरा वातावरण देवी भक्ति में रंगा रहेगा। यह नवरात्र खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि पहले ही दिन साधकों और भक्तों को शुक्ल योग, ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे अत्यंत शुभ संयोग प्राप्त हो रहे हैं, जिन्हें पूजा-पाठ और साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुबह से ही श्रद्धालु देवी मंदिरों में पहुंचकर घट स्थापना करेंगे और मां दुर्गा की आराधना की शुरुआत करेंगे। ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार का नवरात्र विशेष महत्व रखता है, क्योंकि भक्तों को पूरे नौ दिन तिथियों के अनुसार पूर्ण रूप से साधना का अवसर मिलेगा, जो बहुत शुभ संकेत माना जाता है।
महामाया मंदिर के पुजारी और कथा वाचक पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार, इस बार मंदिर में एक विशेष परंपरा का पालन किया जाएगा। माता के दरबार में चकमक पत्थर को रगड़कर उत्पन्न होने वाले प्रकाश से ही मुख्य ज्योत प्रज्ज्वलित की जाएगी, जो शक्ति और पवित्रता का प्रतीक मानी जाती है। इसी तरह दंतेश्वरी मंदिर, काली माता मंदिर सहित सभी प्रमुख देवी स्थलों पर भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के पूजा-अर्चना कर सकें।
इस वर्ष चैत्र नवरात्र 19 मार्च से प्रारंभ होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। घट स्थापना के लिए पूरे दिन विभिन्न शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे, जिससे हर गृहस्थ और साधक अपनी सुविधा अनुसार पूजा प्रारंभ कर सकेगा। सुबह 6 बजे से 7:30 बजे तक शुभ चौघड़िया, फिर 9 से 10:30 बजे तक उत्तम चौघड़िया का समय मिलेगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक लाभ का चौघड़िया प्रभावी रहेगा।
इन सभी में सबसे खास समय अभिजीत मुहूर्त का होगा, जो सुबह 11:36 से दोपहर 12:24 तक रहेगा। अधिकांश मंदिरों में इसी समय विधि-विधान से घट स्थापना की जाएगी। इसके अतिरिक्त दोपहर 1:31 से 3 बजे तक अमृत चौघड़िया और शाम 4:30 से 6 बजे तक पुनः शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेगा।
इस बार तीन विशेष योगों का संयोग भक्तों के लिए सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश लेकर आया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इन शुभ योगों में की गई साधना और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि इस नवरात्र को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जा रहा है।
चैत्र नवरात्र केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और सकारात्मक ऊर्जा को जीवन में उतारने का अवसर भी है। मां दुर्गा की आराधना के साथ भक्त अपने जीवन में नई ऊर्जा, उत्साह और सफलता की कामना करते हैं। ऐसे में यह नवरात्र हर किसी के लिए नई शुरुआत और शुभ संकेत लेकर आया है।