Amira Chand Jagdish Kumar Exports यानी ‘एयरोप्लेन’ ब्रांड से बासमती चावल बेचने वाली कंपनी का IPO 24 मार्च 2026 से निवेशकों के लिए खुलने जा रहा है। यह इश्यू 27 मार्च तक खुला रहेगा, यानी निवेश के लिए केवल चार दिन का मौका मिलेगा। कंपनी ने इस IPO के जरिए करीब ₹440 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है।
इस इश्यू के लिए प्राइस बैंड ₹201 से ₹212 प्रति शेयर तय किया गया है। कंपनी ने 70 शेयरों का लॉट साइज रखा है, जिसका मतलब है कि ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से रिटेल निवेशकों को कम से कम ₹14,840 का निवेश करना होगा।
यह IPO पूरी तरह से फ्रेश इश्यू है, यानी इसमें ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) का कोई हिस्सा नहीं है। इसका मतलब यह है कि प्रमोटर्स अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रहे, बल्कि कंपनी नए शेयर जारी करके पूंजी जुटा रही है। इस राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से वर्किंग कैपिटल और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा।
इश्यू का 50% हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए, 15% नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) के लिए और 35% रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित रखा गया है।
अगर कंपनी के फाइनेंशियल्स पर नजर डालें, तो 31 दिसंबर 2024 तक के 9 महीनों में कंपनी ने ₹1,421 करोड़ का ऑपरेशनल रेवेन्यू और ₹48.77 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। प्री-आईपीओ वैल्यूएशन करीब ₹1,877 करोड़ आंकी गई है, जबकि लिस्टिंग के बाद इसका मार्केट कैप ₹2,195 करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है।
यह कंपनी करीब 50 साल पुरानी है और भारत के टॉप बासमती चावल एक्सपोर्टर्स में शामिल है। इसका मुकाबला KRBL Limited (इंडिया गेट ब्रांड) और LT Foods (दावत ब्रांड) जैसी बड़ी कंपनियों से है। कंपनी अब FMCG सेगमेंट में भी विस्तार कर रही है।
IPO का अलॉटमेंट 30 मार्च को फाइनल हो सकता है। जिन निवेशकों को शेयर नहीं मिलेंगे, उन्हें 1 अप्रैल तक रिफंड मिल जाएगा और जिनको अलॉटमेंट मिलेगा, उनके डीमैट अकाउंट में उसी दिन शेयर क्रेडिट हो जाएंगे। कंपनी के शेयर 2 अप्रैल 2026 को Bombay Stock Exchange और National Stock Exchange पर लिस्ट होने की संभावना है।
हालांकि निवेश से पहले कुछ जोखिमों को समझना भी जरूरी है। बासमती चावल का बड़ा हिस्सा एक्सपोर्ट होता है, इसलिए सरकार की एक्सपोर्ट पॉलिसी, मानसून की स्थिति, कच्चे माल की कीमत और अंतरराष्ट्रीय तनाव जैसे फैक्टर्स कंपनी के कारोबार पर असर डाल सकते हैं। साथ ही डॉलर-रुपया विनिमय दर में उतार-चढ़ाव भी रेवेन्यू को प्रभावित करता है।
कुल मिलाकर, यह IPO फूड और एक्सपोर्ट सेक्टर में निवेश का एक दिलचस्प अवसर हो सकता है, लेकिन निवेश से पहले जोखिम और फाइनेंशियल्स का आकलन करना बेहद जरूरी है।