छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सरकारी नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर एक महिला कर्मचारी ने लाखों की ठगी को अंजाम दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए भी एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है।
मामला पदमनाभपुर थाना क्षेत्र का है, जहां स्वास्थ्य विभाग में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत प्रिया देशमुख को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि उसने खुद को प्रभावशाली बताकर एक युवती से छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी (CSPDCL) में असिस्टेंट इंजीनियर या सब इंजीनियर की नौकरी दिलाने का झांसा दिया और इसके बदले भारी रकम वसूली।
भिलाई सेक्टर-7 की रहने वाली 29 वर्षीय पायल ने जब पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, तब इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। पायल के मुताबिक, अगस्त 2023 में उसकी मुलाकात प्रिया देशमुख से हुई थी, जहां आरोपी महिला ने अपनी पहुंच और पहचान का हवाला देते हुए सरकारी नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। धीरे-धीरे भरोसा इतना बढ़ाया गया कि पीड़िता ने बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए आरोपी पर विश्वास कर लिया।
इस ठगी का सबसे बड़ा पहलू यह रहा कि आरोपी ने सिर्फ मौखिक भरोसा ही नहीं दिया, बल्कि पूरे प्लान के तहत फर्जी दस्तावेज भी तैयार किए। प्रिया देशमुख ने पीड़िता से कुल 20 लाख रुपये की मांग की, जिसमें से 10 लाख रुपये एडवांस के तौर पर ले लिए गए। भरोसा मजबूत करने के लिए उसने पायल को अपने कथित सहयोगी रजत गुप्ता से भी मिलवाया, जो खुद को मंत्रालय में पदस्थ बताता था।
नवंबर 2023 में पायल को रायपुर के सर्किट हाउस बुलाकर एक ज्वाइनिंग लेटर थमाया गया, जिसमें उसे एई पद पर नियुक्त दिखाया गया था। लेकिन जब इस नियुक्ति पत्र की सच्चाई जांची गई, तो वह पूरी तरह फर्जी निकला। इसके बाद पीड़िता को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ और उसने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की और 24 घंटे के भीतर ही आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इस मामले में शामिल दूसरे आरोपी रजत गुप्ता की तलाश अभी जारी है।
जांच में यह भी सामने आया है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। आरोपी महिला पहले भी अपने पति प्रशांत कुमार देशमुख के साथ मिलकर इसी तरह की ठगी को अंजाम दे चुकी है। एक अन्य युवक से भी नौकरी दिलाने के नाम पर 10 लाख रुपये ठगे गए थे, जिसमें फर्जी नियुक्ति पत्र का इस्तेमाल किया गया था।
पुलिस ने आरोपियों के पास से फर्जी ज्वाइनिंग लेटर की ई-मेल कॉपी, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।
यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि किस तरह नौकरी के नाम पर लोगों की उम्मीदों के साथ खेला जा रहा है। ऐसे में युवाओं को सतर्क रहने की जरूरत है और किसी भी तरह के ऑफर या दावे पर आंख मूंदकर भरोसा करने से पहले उसकी पूरी जांच करना बेहद जरूरी है।