भारतीय शेयर बाजार जहां शुक्रवार को जबरदस्त तेजी के साथ आगे बढ़ता नजर आया, वहीं बैंकिंग सेक्टर का दिग्गज HDFC Bank दबाव में दिखाई दिया। बाजार की मजबूती के बावजूद इस बैंक का शेयर लगातार दूसरे दिन गिरावट में रहा, जिसने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
शुक्रवार सुबह कारोबार की शुरुआत में ही HDFC Bank का स्टॉक करीब 1.7 प्रतिशत टूटकर 784.75 रुपये तक पहुंच गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई जब सेंसेक्स 700 अंकों से ज्यादा की बढ़त के साथ 74,900 के पार कारोबार कर रहा था और निफ्टी भी 23,200 के ऊपर मजबूती दिखा रहा था। इसके बावजूद HDFC Bank का टॉप लूजर्स में शामिल होना साफ संकेत देता है कि यह कमजोरी पूरे बाजार की नहीं, बल्कि कंपनी से जुड़े खास कारणों की वजह से है।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन Atanu Chakraborty का अचानक इस्तीफा माना जा रहा है। उन्होंने अपने पद से हटते हुए वैल्यू और एथिक्स को लेकर मतभेद की बात कही, जिससे निवेशकों के बीच कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर चिंता बढ़ गई। इससे पहले दिन ही शेयर में करीब 5 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी जा चुकी थी, जिसने बाजार में बेचैनी और बढ़ा दी।
हालांकि इस स्थिति को संभालने के लिए Reserve Bank of India और बैंक मैनेजमेंट दोनों ने भरोसा दिलाने की कोशिश की है। आरबीआई ने साफ तौर पर कहा है कि बैंक के संचालन या गवर्नेंस में कोई गंभीर जोखिम नहीं है। साथ ही, संचालन में स्थिरता बनाए रखने के लिए Keki Mistry को तीन महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी भी दे दी गई है।
बाजार में फैली इस चिंता के बीच ब्रोकरेज हाउस का रुख फिलहाल संतुलित नजर आ रहा है। वैश्विक ब्रोकरेज Jefferies ने इस शेयर पर अपनी “Buy” रेटिंग बरकरार रखी है और 1240 रुपये का टारगेट दिया है, जो मौजूदा स्तर से करीब 55 प्रतिशत ज्यादा है। उनका मानना है कि बैंक की गवर्नेंस मजबूत बनी हुई है और जैसे-जैसे मैनेजमेंट में स्थिरता आएगी, निवेशकों की चिंता भी कम होगी।
कुल मिलाकर, HDFC Bank के शेयर में आई यह गिरावट एक तात्कालिक झटका जरूर है, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे लंबी अवधि के संकट के रूप में नहीं देख रहे। अब निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में मैनेजमेंट किस तरह भरोसा बहाल करता है और क्या शेयर फिर से अपनी मजबूती हासिल कर पाता है।