मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Narendra Modi ने कूटनीतिक पहल तेज करते हुए कई वैश्विक नेताओं से बातचीत की है। इस दौरान भारत ने साफ संदेश दिया है कि क्षेत्र में शांति, स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा बेहद जरूरी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने Qatar, France, Jordan, Oman और Malaysia के नेताओं से फोन पर बातचीत की। इन चर्चाओं में उन्होंने पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता जताई और खासतौर पर ऊर्जा ढांचे पर हो रहे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की।
पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा कि ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना न केवल गलत है, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील की।
इस बातचीत का एक अहम मुद्दा Strait of Hormuz रहा, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। पीएम मोदी ने इस जलडमरूमध्य में जहाजों के सुरक्षित और निर्बाध आवागमन की आवश्यकता पर जोर दिया, क्योंकि यही रास्ता वैश्विक तेल और गैस सप्लाई की जीवन रेखा माना जाता है।
कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से बातचीत में पीएम मोदी ने ईद की शुभकामनाएं दीं और वहां रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और देखभाल के लिए आभार भी जताया। वहीं जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय के साथ बातचीत में दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात पर चिंता जताई और संकट के समय सहयोग बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की।
भारत का रुख इस पूरे संकट में संतुलित नजर आ रहा है। एक तरफ वह हिंसा और हमलों की निंदा कर रहा है, तो दूसरी ओर कूटनीतिक समाधान की वकालत भी कर रहा है। भारत लगातार यह संदेश दे रहा है कि स्थायी शांति केवल बातचीत और आपसी समझ से ही संभव है।
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में सक्रिय भूमिका निभाता दिख रहा है, जो न केवल अपने हितों की रक्षा कर रहा है बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए भी प्रयासरत है।