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जोमैटो ने बढ़ाई प्लेटफॉर्म फीस: अब हर ऑर्डर होगा महंगा, जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी

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अगर आप ऑनलाइन खाना ऑर्डर करने के आदी हैं, तो अब हर बार ऐप खोलते ही आपको अपनी जेब थोड़ी और ढीली करनी पड़ेगी। देश की प्रमुख फूड डिलीवरी कंपनी Zomato ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में सीधी बढ़ोतरी कर दी है, जिससे हर ऑर्डर अब पहले से ज्यादा महंगा हो गया है।

20 मार्च से लागू हुई नई दरों के तहत प्लेटफॉर्म फीस ₹12.50 से बढ़ाकर ₹14.90 कर दी गई है। यानी अब हर ऑर्डर पर ग्राहकों को ₹2.40 अतिरिक्त देने होंगे। यह रकम खाने की कीमत, डिलीवरी चार्ज और जीएसटी से अलग होती है, इसलिए बिल में इसका सीधा असर दिखाई देगा। देखने में यह बढ़ोतरी छोटी लग सकती है, लेकिन अगर आप नियमित तौर पर ऑनलाइन खाना मंगाते हैं, तो महीने के अंत में यह खर्च काफी बढ़ा हुआ नजर आएगा।

इस फैसले के पीछे कई वजहें सामने आ रही हैं। सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव है, जिसने ऊर्जा बाजार पर दबाव बना दिया है। कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई प्रभावित होने से डिलीवरी लागत बढ़ गई है। जब ईंधन महंगा होता है, तो उसका असर सीधे लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी नेटवर्क पर पड़ता है। ऐसे में कंपनियां अपने बढ़ते खर्च को संतुलित करने के लिए प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाने जैसे कदम उठाती हैं।

हालांकि, कीमतें बढ़ने के बावजूद Zomato के कारोबार में गिरावट नहीं बल्कि तेजी देखने को मिल रही है। अक्टूबर से दिसंबर तिमाही के दौरान कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस अवधि में उसका शुद्ध ऑर्डर मूल्य ₹9,846 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले 16.6% ज्यादा है। वहीं, हर महीने ऑर्डर करने वाले यूजर्स की संख्या भी बढ़कर लगभग 24.9 मिलियन हो गई है, जो 21% की वृद्धि को दर्शाता है। खास बात यह है कि अब छोटे शहरों से भी तेजी से ऑर्डर बढ़ रहे हैं, जो कंपनी के विस्तार की दिशा में बड़ा संकेत है।

तकनीकी स्तर पर भी कंपनी तेजी से आगे बढ़ रही है। Eternal ने अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमताओं को मजबूत करने के लिए OpenAI के साथ साझेदारी को और गहरा किया है। इस सहयोग का उद्देश्य प्लेटफॉर्म को ज्यादा स्मार्ट, तेज और यूजर-फ्रेंडली बनाना है। इसका फायदा Blinkit, डिस्ट्रिक्ट और हाइपरप्योर जैसे प्लेटफॉर्म्स को भी मिलेगा, जहां एआई के जरिए बेहतर सर्विस और ऑप्टिमाइजेशन की कोशिश की जा रही है।

कुल मिलाकर, यह साफ है कि बढ़ती लागत और वैश्विक हालात का असर अब सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। एक तरफ कंपनी का बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ ग्राहकों के लिए हर ऑर्डर थोड़ा और महंगा होता जा रहा है। आने वाले समय में अगर ऊर्जा संकट और बढ़ता है, तो इस तरह की बढ़ोतरी और भी देखने को मिल सकती है।

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