Indian Premier League से पहले देश में सट्टेबाजी का नेटवर्क एक बार फिर तेजी से सक्रिय हो गया है, लेकिन इस बार इसका तरीका पूरी तरह बदल चुका है। पुलिस की सख्ती और वेबसाइट्स पर कार्रवाई के बाद अब सटोरिये डिजिटल प्लेटफॉर्म छोड़कर सीधे लोगों को फोन कॉल के जरिए अपने जाल में फंसा रहे हैं।
अब यह पूरा खेल टेली-मार्केटिंग स्टाइल में चलाया जा रहा है, जहां कॉल सेंटर जैसे सेटअप से लोगों को कॉल कर “घर बैठे लाखों कमाने” का लालच दिया जाता है। जैसे ही कोई व्यक्ति इस जाल में फंसता है, उससे ऑनलाइन पेमेंट करने को कहा जाता है और महज कुछ मिनटों में उसकी सट्टा ID तैयार कर दी जाती है।
इस बार सटोरियों ने लोगों की भावनाओं को भुनाने के लिए नया तरीका अपनाया है। ‘HINDU777’ जैसे नाम और ब्रांडिंग के जरिए भरोसा जीतने की कोशिश की जा रही है। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर SKYEXCH, ALLPANEL777 और DIAMONDEXCH जैसे प्लेटफॉर्म्स के नाम पर तेजी से प्रचार किया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ा जा सके।
ठगों का दावा होता है कि लेनदेन “वेरीफाइड बैंक अकाउंट” से किया जाएगा और 24 घंटे कस्टमर सपोर्ट भी मिलेगा, जिससे लोगों को भरोसा दिलाया जा सके। लेकिन असल में यह पूरा नेटवर्क फर्जी बैंक खातों और प्रॉक्सी ट्रांजैक्शन के जरिए चलता है, जहां पैसा एक जगह से दूसरी जगह घुमाया जाता है और असली सोर्स छुपा दिया जाता है।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस तरह की ज्यादातर वेबसाइट्स भारत में नहीं, बल्कि विदेशों—जैसे साइप्रस, माल्टा, कुराकाओ और मॉरीशस—में रजिस्टर्ड होती हैं। इन देशों में गैम्बलिंग को कानूनी संरक्षण मिलता है, जिससे ये गिरोह भारत में अवैध तरीके से सट्टा चलाने के बावजूद कानून से बच निकलते हैं।
सरकार भले ही 122 से ज्यादा गैम्बलिंग ऐप्स पर बैन लगा चुकी हो, लेकिन इसके बावजूद सैकड़ों प्लेटफॉर्म अब भी सक्रिय हैं। ये लगातार नए नाम और डोमेन के साथ फिर से शुरू हो जाते हैं, जिससे इन्हें पकड़ना और रोकना मुश्किल हो जाता है।
इस पूरे नेटवर्क के पीछे तकनीक भी बड़ी भूमिका निभा रही है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन ऐप्स का एल्गोरिदम इस तरह डिजाइन किया जाता है कि कंपनी को ज्यादा मुनाफा हो और यूजर धीरे-धीरे नुकसान की ओर बढ़े। यानी यह गेम नहीं, बल्कि पूरी तरह से सेट किया गया सिस्टम होता है।
कुल मिलाकर, IPL से पहले सट्टेबाजों ने अपना खेल और तेज कर दिया है। अब खतरा सिर्फ ऑनलाइन वेबसाइट्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे आपके मोबाइल तक पहुंच चुका है। ऐसे में सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है, वरना “आसान कमाई” का लालच भारी नुकसान में बदल सकता है।