हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद खराब साबित हुई, जहां सोमवार को जोरदार गिरावट ने निवेशकों को झटका दे दिया। बाजार की इस बड़ी गिरावट को ‘ब्लैक मंडे’ कहा जा रहा है, क्योंकि खुलते ही बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि प्रमुख सूचकांक संभल ही नहीं पाए। BSE Sensex करीब 1600 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 में भी 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
सुबह के कारोबार में ही बाजार की हालत कमजोर नजर आई। करीब 10 बजे के आसपास सेंसेक्स 1600 से ज्यादा अंकों की गिरावट के साथ 72900 के करीब ट्रेड कर रहा था, जबकि निफ्टी भी 500 अंकों से ज्यादा फिसलकर 22600 के स्तर पर पहुंच गया। गिरावट का दायरा भी काफी व्यापक रहा, जहां हजारों शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे और बहुत कम शेयर ही बढ़त में रहे।
इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है, जो भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए चिंता बढ़ाने वाला संकेत है। महंगे तेल का सीधा असर महंगाई, रुपये की मजबूती और निवेशकों के भरोसे पर पड़ता है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ता है।
इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की हालत और खराब कर दी है। मार्च महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार पैसा निकालते नजर आए हैं और अब तक 90 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी हो चुकी है। वैश्विक अनिश्चितता, रुपये की कमजोरी और तेल की ऊंची कीमतों ने विदेशी निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
बाजार में डर का माहौल भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। India VIX में तेज उछाल दर्ज किया गया है, जो यह बताता है कि निवेशकों के बीच घबराहट और अनिश्चितता बढ़ रही है। जब वोलैटिलिटी इंडेक्स ऊपर जाता है, तो इसका मतलब होता है कि बाजार में जोखिम का स्तर भी बढ़ गया है।
भू-राजनीतिक तनाव भी इस गिरावट की एक बड़ी वजह बनकर सामने आया है। Iran की ओर से Strait of Hormuz को लेकर दी गई चेतावनी ने वैश्विक बाजारों में चिंता और बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की बड़ी तेल सप्लाई का केंद्र है, और इसके बाधित होने की आशंका ने निवेशकों को जोखिम से दूर रहने पर मजबूर कर दिया है।
वैश्विक संकेत भी बाजार के लिए सकारात्मक नहीं रहे। एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखी गई है और United States, Israel और Iran के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में हालात सामान्य नहीं होते और तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। फिलहाल यह समय निवेशकों के लिए सतर्क रहने का है, क्योंकि वैश्विक घटनाओं का असर सीधे भारतीय बाजार की दिशा तय कर रहा है।