कक्षा 10 के छात्रों के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है। Central Board of Secondary Education ने मई 2026 में आयोजित होने वाली सेकेंड बोर्ड परीक्षा को लेकर नया सर्कुलर जारी किया है। इस पहल का उद्देश्य उन छात्रों को एक और मौका देना है, जो अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं और बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं।
बोर्ड ने साफ किया है कि छात्र अधिकतम तीन विषयों में ही सुधार परीक्षा दे सकेंगे। यह परीक्षा मुख्य (फरवरी-मार्च) बोर्ड परीक्षा के बाद आयोजित की जाएगी, ताकि छात्र अपने रिजल्ट को बेहतर कर सकें। यह कदम छात्रों के लिए राहत लेकर आया है, क्योंकि अब उन्हें पूरे साल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
इस प्रक्रिया के तहत स्कूलों को “लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स” यानी LOC जमा करने के लिए तीन चरण निर्धारित किए गए हैं। पहला चरण 18 मार्च से 31 मार्च तक चलेगा। दूसरा चरण मुख्य परीक्षा के परिणाम घोषित होने के अगले दिन से 5 दिनों तक रहेगा, जबकि तीसरा चरण परिणाम घोषित होने के 7वें दिन से अगले 2 दिनों तक खुला रहेगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के बाद कोई अतिरिक्त मौका नहीं दिया जाएगा, इसलिए समय का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
बोर्ड ने कुछ सख्त नियम भी तय किए हैं। सेकेंड बोर्ड परीक्षा में विषय बदलने की अनुमति नहीं होगी। केवल गणित विषय में कुछ सीमित छूट दी जा सकती है। इसके अलावा छात्र के डेटा में भी कोई बदलाव संभव नहीं होगा। खास बात यह है कि इंटरनल असेसमेंट में सुधार का विकल्प नहीं मिलेगा, क्योंकि यह पूरे साल की प्रक्रिया पर आधारित होता है।
फीस की बात करें तो छात्रों को प्रति विषय 300 रुपये शुल्क देना होगा। यदि कोई छात्र तय समय सीमा के बाद आवेदन करता है, तो उसे 2000 रुपये का विलंब शुल्क अतिरिक्त देना पड़ेगा। भुगतान केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा।
पात्रता के नियम भी स्पष्ट कर दिए गए हैं। सेकेंड बोर्ड परीक्षा में वही छात्र शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने मुख्य परीक्षा में हिस्सा लिया हो और कम से कम तीन विषयों में परीक्षा दी हो। पास हुए छात्र अधिकतम तीन विषयों में सुधार कर सकते हैं, जबकि कंपार्टमेंट वाले छात्र भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
हालांकि, जिन छात्रों ने तीन से कम विषयों में परीक्षा दी है या कई विषयों में असफल रहे हैं, वे इस परीक्षा के लिए पात्र नहीं होंगे। ऐसे छात्रों को अगले साल फरवरी में होने वाली मुख्य परीक्षा का इंतजार करना होगा।
कुल मिलाकर, CBSE का यह फैसला छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आया है, जिससे वे बिना साल गंवाए अपने अंकों में सुधार कर सकते हैं और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।