देश में बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच Oil Marketing Companies एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में हैं। योजना के तहत अब 14.2 किलो के घरेलू LPG सिलेंडर में केवल 10 किलो गैस भरकर देने का प्रस्ताव है, ताकि सीमित स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा घरों तक पहुंचाया जा सके।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल कंपनियों का मानना है कि औसतन एक परिवार 10 किलो गैस में भी करीब एक महीने तक काम चला सकता है। ऐसे में कम गैस भरकर ज्यादा लोगों तक सप्लाई सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई जा रही है।
इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में जारी तनाव है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण गैस सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। खासतौर पर Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री मार्ग के बाधित होने से भारत आने वाले LPG टैंकर अटक गए हैं, जिससे आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।
अगर यह योजना लागू होती है, तो उपभोक्ताओं को राहत भी मिल सकती है। क्योंकि गैस की मात्रा कम होने के साथ-साथ सिलेंडर की कीमत भी उसी अनुपात में घटाई जाएगी। फिलहाल दिल्ली में 14.2 किलो सिलेंडर की कीमत करीब ₹913 और मुंबई में ₹912.50 है। 10 किलो गैस मिलने पर ग्राहकों को कम भुगतान करना होगा। पहचान के लिए नए सिलेंडरों पर विशेष स्टिकर भी लगाया जाएगा।
हालांकि, इस बदलाव को लागू करना आसान नहीं होगा। बॉटलिंग प्लांट्स को अपने सिस्टम दोबारा सेट करने होंगे और इसके लिए कई प्रशासनिक मंजूरियां भी जरूरी होंगी। इसके अलावा अचानक बदलाव से लोगों में भ्रम या असंतोष भी पैदा हो सकता है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत अपनी LPG जरूरत का लगभग 60% आयात करता है, जिसमें से बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। वर्तमान में कई गैस टैंकर फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और सप्लाई चेन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
सरकार ने पहले ही गैस बचाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे सिलेंडर बुकिंग के बीच समय बढ़ाना और PNG यूजर्स के लिए LPG उपयोग पर सख्ती करना।
कुल मिलाकर, यह कदम आने वाले समय में गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए एक अस्थायी लेकिन जरूरी उपाय माना जा रहा है, जिसका सीधा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ेगा।