दक्षिण कोरिया की गेमिंग कंपनी Krafton इन दिनों एक बड़े कानूनी विवाद में फंसी हुई है। मामला इतना दिलचस्प है कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी ChatGPT की भूमिका भी सामने आई है—और यही कंपनी के लिए भारी पड़ गई।
दरअसल, 2021 में क्राफ्टन ने Unknown Worlds Entertainment को करीब 500 मिलियन डॉलर में खरीदा था। इस डील में एक शर्त थी कि अगर कंपनी तय लक्ष्य हासिल करती है, तो उसके लीडर्स को 250 मिलियन डॉलर (लगभग 2100 करोड़ रुपये) का बोनस दिया जाएगा।
जब ‘Subnautica 2’ की सफलता के बाद यह बोनस देने की नौबत आई, तो क्राफ्टन के CEO Changhan Kim ने इस रकम से बचने का रास्ता खोजने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने वकीलों की बजाय ChatGPT से सलाह ली। AI के सुझाव पर कंपनी ने ‘Project X’ नाम से एक आंतरिक टास्क फोर्स बनाई, जिसका मकसद बोनस कम करवाना या संबंधित अधिकारियों को हटाना था।
जब कंपनी के लीडर्स ने शर्तों में बदलाव से इनकार किया, तो क्राफ्टन ने उन्हें पद से हटा दिया। मामला बढ़ते-बढ़ते अमेरिका के डेलावेयर कोर्ट पहुंच गया, जहां जज ने इस पूरी रणनीति पर कड़ी नाराजगी जताई।
अदालत ने साफ कहा कि AI के सहारे बनाई गई यह रणनीति गलत है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने हटाए गए अधिकारियों को बहाल करने या फैसले को पलटने का आदेश दिया, साथ ही कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
हालांकि, क्राफ्टन ने कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए भी इससे असहमति जताई है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार करने की बात कही है।
यह पूरा मामला कॉर्पोरेट दुनिया के लिए एक बड़ा सबक बनकर सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI टूल्स जानकारी और सुझाव देने में मददगार हो सकते हैं, लेकिन जटिल कानूनी और व्यावसायिक फैसलों में इन पर पूरी तरह निर्भर होना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, यह घटना बताती है कि टेक्नोलॉजी जितनी ताकतवर है, उतनी ही जिम्मेदारी के साथ उसका इस्तेमाल भी जरूरी है।