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“जंग जारी रही तो गंभीर असर”—PM मोदी का अलर्ट, बोले- देश के लिए सबसे बड़ी परीक्षा का समय

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में अहम बयान देते हुए साफ चेतावनी दी कि अगर अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध जारी रहा, तो इसके गंभीर वैश्विक और घरेलू प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाला समय भारत के लिए “सबसे बड़ी परीक्षा” जैसा होगा और इससे निपटने के लिए देश को “टीम इंडिया” की तरह एकजुट होकर काम करना होगा।

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में कई जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय क्रू भी शामिल है। इसके चलते भारत के व्यापारिक रास्ते प्रभावित हो रहे हैं और पेट्रोल-डीजल, गैस व खाद जैसे जरूरी सामान की सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस वैश्विक संकट का असर सिर्फ अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महंगाई, सप्लाई चेन और आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों के लिए 7 एम्पॉवर्ड ग्रुप बनाए हैं, जो तेल, गैस, फर्टिलाइजर और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रणनीति तैयार करेंगे।

राज्यों की भूमिका पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे समय में गरीबों और श्रमिकों की सुरक्षा सबसे अहम है। उन्होंने राज्यों से अपील की कि प्रधानमंत्री गरीब अन्न कल्याण योजना का लाभ जरूरतमंदों तक लगातार पहुंचता रहे। साथ ही उन्होंने जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।

किसानों को भरोसा दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार आने वाले बुआई सीजन के लिए खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि हर चुनौती के बीच किसानों के हितों की रक्षा की जाएगी और किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी।

विदेशों में फंसे भारतीयों को लेकर भी सरकार सक्रिय है। पीएम मोदी ने बताया कि अब तक 3 लाख 75 हजार से ज्यादा भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं, जिनमें ईरान से लौटे हजारों लोग भी शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ भारतीयों की मौत की खबर दुखद है और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद दी जा रही है।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का यह बयान साफ संकेत देता है कि भारत सरकार इस संकट को सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय घटना नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक और सामाजिक चुनौती के रूप में देख रही है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह स्थिति किस दिशा में जाती है और भारत इससे कैसे निपटता है।

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