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होर्मुज पर ईरान का शिकंजा, ट्रंप का दावा—खत्म हुई तेहरान की ताकत, दुनिया पर मंडराया तेल संकट का खतरा

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पश्चिम एशिया में भड़कती जंग अब केवल मिसाइलों और बमों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर दुनिया की आर्थिक नसों तक पहुंच चुका है। इसी बीच ईरान ने वैश्विक तेल सप्लाई की धड़कन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ऐसा फैसला लिया है, जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। तेहरान ने साफ संकेत दे दिया है कि अब इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से वही जहाज गुजर पाएंगे, जिन्हें ईरान “गैर-दुश्मन” मानेगा। यानी अब हर जहाज को इस मार्ग से गुजरने से पहले ईरानी अधिकारियों से अनुमति और समन्वय करना अनिवार्य होगा।

न्यूयॉर्क स्थित ईरानी मिशन की ओर से जारी बयान में यह साफ किया गया कि यह कदम किसी आक्रामक नीति का हिस्सा नहीं बल्कि अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए उठाया गया है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे एक बड़े रणनीतिक दबाव के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य केवल एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की लाइफलाइन है। यहां से गुजरने वाले तेल टैंकर ही एशिया, यूरोप और अमेरिका तक ईंधन पहुंचाते हैं।

ईरान ने अपने बयान में एक और सख्त चेतावनी भी दी है। तेहरान ने स्पष्ट कहा है कि अगर उसके पावर प्लांट्स या ऊर्जा ढांचे पर हमला हुआ, तो जवाब ऐसा होगा जो “विनाशकारी” साबित होगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजरायल पर लगातार हमलों के आरोप लगाए जा रहे हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने संसाधनों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने से पीछे नहीं हटेगा।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान और भी ज्यादा सनसनीखेज है। उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका इस संघर्ष में निर्णायक बढ़त हासिल कर चुका है और ईरान की नौसेना, वायु सेना और संचार प्रणाली लगभग पूरी तरह खत्म हो चुकी है। ट्रंप के अनुसार, अब ईरान की सैन्य क्षमता इतनी कमजोर हो चुकी है कि वह बातचीत के लिए मजबूर है। हालांकि, इस दावे पर ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे स्थिति और भी रहस्यमय बन गई है।

असल चिंता की जड़ होर्मुज जलडमरूमध्य ही है, जो ओमान और ईरान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण “ऑयल चोकपॉइंट” माना जाता है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर यहां किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। नतीजतन महंगाई बढ़ेगी, अर्थव्यवस्थाएं हिलेंगी और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट खड़ा हो सकता है।

अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह टकराव और बढ़ेगा या कूटनीति के जरिए इसे संभाल लिया जाएगा। लेकिन फिलहाल हालात यही संकेत दे रहे हैं कि यह संघर्ष केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर हर देश, हर नागरिक और हर जेब तक पहुंच सकता है।

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