छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जहां कॉल सेंटर की आड़ में विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा था। इस कार्रवाई में करीब 40 जालसाजों को गिरफ्तार किया गया है, जो खुद को अमेजन और एप्पल जैसी बड़ी कंपनियों का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर अमेरिका और यूरोप के लोगों से ठगी कर रहे थे।
पुलिस ने गंज थाना क्षेत्र के पिथालिया कॉम्प्लेक्स और राजेंद्र नगर इलाके के अंजली टॉवर समेत चार अलग-अलग फ्लोर पर चल रहे इन फर्जी कॉल सेंटर्स पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मुखबिर की सूचना और लंबे समय तक निगरानी के बाद की गई। हैरानी की बात यह है कि इस गिरोह में शामिल ज्यादातर युवक 20 से 25 साल की उम्र के हैं और अलग-अलग एजेंसियों के जरिए यहां काम पर लगाए गए थे।
जांच में सामने आया है कि ये कॉल सेंटर रात के समय संचालित होते थे, ताकि अमेरिकी और यूरोपीय टाइम जोन के अनुसार ग्राहकों से संपर्क किया जा सके। ठगी के लिए ये लोग खुद को कस्टमर सपोर्ट एजेंट बताकर लोन दिलाने, रिफंड प्रोसेस करने या टेक्निकल समस्या सुलझाने का झांसा देते थे।
इस गिरोह की चालाकी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इन्होंने इंटरनेट पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर इस तरह अपलोड किए थे कि वे गूगल सर्च में ऊपर दिखाई दें। जब विदेशी नागरिक असली कंपनी का नंबर समझकर इन पर कॉल करते थे, तो कॉल सेंटर में बैठे डायलर उनसे संपर्क कर ठगी को अंजाम देते थे।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि कॉल सेंटर में काम करने वाले कई युवकों को अंग्रेजी ठीक से बोलना या समझना भी नहीं आता था। वे गूगल ट्रांसलेट का सहारा लेकर हिंदी में लिखे मैसेज को अंग्रेजी में बदलकर भेजते थे और विदेशी ग्राहकों के जवाब को हिंदी में ट्रांसलेट कर समझते थे। यानी पूरा ठगी का खेल तकनीक के सहारे चलाया जा रहा था।
इन युवकों को इस काम के बदले सिर्फ 15 से 20 हजार रुपए महीने की सैलरी दी जाती थी, जबकि गिरोह करोड़ों की ठगी को अंजाम दे रहा था। इससे साफ है कि असली मास्टरमाइंड पर्दे के पीछे बैठकर पूरा नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था।
प्रारंभिक जांच में इस रैकेट का कनेक्शन महाराष्ट्र, राजस्थान और अब छत्तीसगढ़ तक फैला हुआ सामने आया है। इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक गुजरात के अहमदाबाद का रहने वाला रोहित यादव बताया जा रहा है, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
फिलहाल पुलिस इस मामले में और बड़े खुलासे की तैयारी कर रही है और उम्मीद है कि आने वाले समय में इस इंटरनेशनल ठगी नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आएंगे।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर ठगी का जाल कितनी तेजी से फैल रहा है और कैसे कम पढ़े-लिखे युवाओं को भी इसमें शामिल कर बड़े स्तर पर अपराध को अंजाम दिया जा रहा है। ऐसे में सतर्क रहना और किसी भी अनजान कॉल या लिंक पर भरोसा न करना बेहद जरूरी है।