मध्य प्रदेश के डबरा से प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। Economic Offences Wing (EOW) ने करीब ₹1.31 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी के मामले में तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) और एक संविदा कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह पूरा मामला एक शिकायत के बाद सामने आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि योजना के नियमों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि अप्रैल 2023 से अप्रैल 2024 के बीच कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन किए गए, जिनमें नियमों का पालन नहीं किया गया।
सबसे बड़ी अनियमितता यह सामने आई कि 13 लाभार्थियों को निर्धारित सीमा से अधिक राशि ट्रांसफर कर दी गई। जहां प्रति हितग्राही ₹2.50 लाख दिए जाने का प्रावधान है, वहीं इन्हें ₹3-3 लाख तक की राशि भेजी गई। इसके अलावा, जरूरी प्रक्रियाएं जैसे जियो-टैगिंग और दस्तावेजी सत्यापन भी पूरी तरह नजरअंदाज किए गए।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि लाभार्थियों के खातों में सीधे पैसे तो भेजे गए, लेकिन उसके लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई अधूरी थी। इससे पूरे सिस्टम में मिलीभगत की आशंका और गहरी हो गई है।
मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि तत्कालीन CMO ने एक संविदा कर्मचारी को पोर्टल के जरिए वित्तीय लेन-देन की पूरी छूट दे दी थी। आरोप है कि इसी अधिकार का दुरुपयोग कर योजना के फंड में हेराफेरी की गई और रिश्वत लेकर पैसा गलत तरीके से बांटा गया।
अब Economic Offences Wing इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। सभी ट्रांजैक्शन, दस्तावेज और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से जांच की जाएगी।
कुल मिलाकर, यह मामला सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में जांच के और बड़े खुलासे होने की संभावना है।