अगर आपने अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में कोई गलती कर दी है या कोई आय दिखाना भूल गए हैं, तो अब उसे सुधारने का आखिरी मौका आपके पास है। ITR-U फाइल करने की अंतिम तारीख 31 मार्च तय की गई है। इस तारीख के बाद न सिर्फ सुधार का मौका मुश्किल हो जाएगा, बल्कि अतिरिक्त टैक्स और ब्याज का बोझ भी तेजी से बढ़ सकता है।
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(8A) के तहत मिलने वाली यह सुविधा उन करदाताओं के लिए राहत है, जिन्होंने या तो रिटर्न गलत भरी है या समय पर फाइल नहीं कर पाए। इस विकल्प के जरिए आप अपनी छूटी हुई आय को घोषित कर सकते हैं और पुरानी गलतियों को सुधार सकते हैं।
नियमों के अनुसार, किसी भी असेसमेंट ईयर के खत्म होने के 48 महीनों के भीतर ITR-U फाइल किया जा सकता है, लेकिन हर साल 31 मार्च का दिन बेहद अहम होता है, क्योंकि जैसे-जैसे समय गुजरता है, अतिरिक्त टैक्स की दर बढ़ती जाती है। अगर आप जल्दी सुधार कर लेते हैं तो कम पेनल्टी देनी पड़ती है, लेकिन देरी करने पर 70% तक अतिरिक्त टैक्स और ब्याज देना पड़ सकता है।
बजट 2026 में इसमें कुछ अहम बदलाव भी किए गए हैं। अब री-असेसमेंट शुरू होने के बाद भी ITR-U फाइल किया जा सकता है, हालांकि इसके लिए 10% अतिरिक्त टैक्स देना होगा। साथ ही अब लॉस सेट-ऑफ की सुविधा भी दी गई है, जिससे करदाताओं को राहत मिल सकती है।
टैक्स एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि ITR-U कोई अनिवार्य प्रक्रिया नहीं है, लेकिन यह एक “सेफ्टी ऑप्शन” जरूर है। अगर आपने गलती को नजरअंदाज किया, तो आयकर विभाग की ओर से नोटिस, जांच और भारी जुर्माने (टैक्स का 200% तक) का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए बेहतर यही है कि 31 मार्च से पहले अपनी टैक्स रिटर्न की पूरी समीक्षा करें। अगर कोई गलती या छूटी हुई जानकारी सामने आती है, तो तुरंत ITR-U फाइल करके खुद को भविष्य की परेशानियों से बचा लें।