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“पेट्रोल-गैस सप्लाई पर सरकार अलर्ट: CM साय की हाई लेवल मीटिंग, विपक्ष ने साधा निशाना”

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छत्तीसगढ़ में पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता को लेकर सरकार ने सतर्क रुख अपनाया है। शनिवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशभर के अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर हालात की समीक्षा की और जमीनी स्थिति का फीडबैक लिया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब राज्य में ईंधन आपूर्ति को लेकर चर्चाएं और सवाल लगातार उठ रहे हैं।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस अहम बैठक में सभी जिलों के कलेक्टर, फूड ऑफिसर, कमिश्नर और आईजी स्तर के अधिकारी जुड़े। मुख्यमंत्री ने पेट्रोल, डीजल और गैस की उपलब्धता को लेकर विस्तृत जानकारी ली और अधिकारियों से साफ तौर पर कहा कि किसी भी तरह की जमाखोरी या कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए।

बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल कहीं से भी पेट्रोलियम पदार्थों की कमी की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि जमाखोरी के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है, ताकि सप्लाई सिस्टम प्रभावित न हो।

इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ मुख्य सचिव विकास शील, प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, डीजीपी अरुण देव गौतम और खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले भी मौजूद रहीं। बैठक का मुख्य उद्देश्य यही था कि किसी भी संभावित संकट को समय रहते नियंत्रित किया जा सके और आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो।

हालांकि, इस पूरी कवायद के बीच राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक यह कहते रहे कि गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन अब अचानक बैठकों का दौर शुरू हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीनी हकीकत कुछ और है और लोग पेट्रोल पंपों पर लाइन लगाने को मजबूर हैं।

दीपक बैज ने यह भी कहा कि सरकार को सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए और आम जनता से माफी मांगनी चाहिए, अगर वास्तव में सप्लाई में दिक्कत है। उनके इस बयान के बाद मुद्दा और गरमा गया है, जहां एक तरफ सरकार स्थिति सामान्य होने का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष इसे वास्तविक संकट बता रहा है।

कुल मिलाकर, पेट्रोल और गैस की उपलब्धता को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में जमीनी हालात क्या रुख लेते हैं और क्या सरकार अपने दावों पर पूरी तरह खरी उतर पाती है।

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