छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक चौंकाने वाले तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। तरबूज से भरी पिकअप के नीचे छिपाकर ले जाया जा रहा 2 क्विंटल 25 किलो गांजा जब्त किया गया है, जिसकी कीमत करीब 1 करोड़ 12 लाख 50 हजार रुपये बताई जा रही है। इस मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
यह पूरा ऑपरेशन एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स और सिंघोड़ा पुलिस की सतर्कता का नतीजा है। पुलिस को पहले ही सूचना मिल गई थी कि ओडिशा से एक पिकअप वाहन में भारी मात्रा में गांजा छत्तीसगढ़ के रास्ते उत्तर प्रदेश भेजा जा रहा है। खास बात यह थी कि इस पिकअप को सुरक्षित निकालने के लिए एक कार भी आगे-आगे चल रही थी, जिसमें बैठे लोग रास्ते पर नजर रख रहे थे।
सूचना मिलते ही पुलिस ने ओडिशा-छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर NH-53 के पास रेहटीखोल में नाकाबंदी कर दी। कुछ ही देर में संदिग्ध कार और उसके पीछे आ रही पिकअप को रोक लिया गया। पहली नजर में पिकअप में तरबूज भरे नजर आए, लेकिन पुलिस को शक हुआ और तलाशी शुरू की गई।
जैसे ही तरबूज हटाए गए, नीचे प्लास्टिक की बोरियों में छिपाकर रखा गया गांजा बरामद हो गया। कुल 9 बोरियों में यह मादक पदार्थ छिपाया गया था। इसके बाद पुलिस ने मौके पर ही सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गांजा ओडिशा के संबलपुर से लोड किया गया था और इसे उत्तर प्रदेश के चित्रकूट ले जाया जा रहा था। पकड़े गए आरोपियों में चार उत्तर प्रदेश और दो मध्य प्रदेश के निवासी हैं, जो संगठित तरीके से इस तस्करी में शामिल थे।
इस कार्रवाई में पुलिस ने सिर्फ गांजा ही नहीं, बल्कि तस्करी में इस्तेमाल किए गए पिकअप वाहन, एक कार और मोबाइल फोन समेत कुल 1.25 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति भी जब्त की है। सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है और सोर्स से लेकर डेस्टिनेशन तक नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, यह कार्रवाई न सिर्फ तस्करों के लिए बड़ा झटका है, बल्कि यह भी दिखाती है कि पुलिस अब नए-नए तरीकों से हो रही तस्करी पर कड़ी नजर रखे हुए है।


