भारत में साफ और भविष्य की तकनीक वाली मोबिलिटी की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने हाइड्रोजन फ्यूल सेल व्हीकल और हाइड्रोजन आधारित वाहनों के लिए नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। इस पहल का मकसद देश में ग्रीन एनर्जी ट्रांसपोर्ट को सुरक्षित, मानकीकृत और बड़े स्तर
सरकार ने साफ किया है कि हाइड्रोजन से चलने वाले इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) वाहनों के लिए टाइप अप्रूवल अब AIS 195:2023 के तहत होगा। वहीं, इन वाहनों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल को IS 16061:2021 मानकों का पालन करना जरूरी होगा।
फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी वाले वाहनों के लिए भी अलग गाइडलाइन तय की गई है, जिससे पैसेंजर और कमर्शियल व्हीकल्स को सुरक्षित तरीके से सड़कों पर उतारा जा सके।
🚗 टू-व्हीलर से लेकर बड़े वाहन तक शामिल
इस नए फ्रेमवर्क में सिर्फ कारें ही नहीं, बल्कि टू-व्हीलर और छोटे वाहन भी शामिल किए गए हैं। Category L के तहत आने वाले इन वाहनों के लिए AIS 206:2024 लागू होगा।
यानी आने वाले समय में बाइक और स्कूटर भी हाइड्रोजन से चलते नजर आ सकते हैं।
🔥 क्यों जरूरी हैं ये नियम?
हाइड्रोजन एक बेहद ज्वलनशील गैस है, इसलिए इसकी स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और इस्तेमाल के लिए सख्त सुरक्षा मानकों की जरूरत होती है।
सरकार का यह कदम न सिर्फ सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि इस नई टेक्नोलॉजी को बड़े स्तर पर अपनाने का रास्ता भी साफ करेगा।
📈 इंडस्ट्री और देश को क्या फायदा?
इस नए नियमों के लागू होने से ऑटो कंपनियों को स्पष्ट दिशा मिलेगी, जिससे हाइड्रोजन वाहनों के विकास और लॉन्च में तेजी आएगी।
साथ ही, निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और भारत ग्रीन मोबिलिटी की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ेगा।
🌍 भविष्य की ओर बड़ा कदम
हाइड्रोजन आधारित वाहन पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे और प्रदूषण घटाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
यह पहल भारत को सस्टेनेबल और क्लीन एनर्जी की दिशा में मजबूत बनाती है, जहां आने वाले समय में सड़कें ज्यादा साफ और टेक्नोलॉजी से भरपूर होंगी।
पर लागू करना है।