इस नई तकनीक के आने से कैंसर मरीजों को इलाज के लिए दूर-दराज के शहरों में जाने की मजबूरी काफी हद तक खत्म हो जाएगी। खासतौर पर उन मरीजों के लिए यह एक बड़ी राहत है, जो आर्थिक, शारीरिक या मानसिक कारणों से बड़े शहरों में इलाज कराने में असमर्थ रहते थे।
दा विंची Xi रोबोटिक सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सर्जरी के दौरान बेहद छोटे चीरे लगाए जाते हैं। इससे न सिर्फ रक्तस्राव कम होता है, बल्कि ऑपरेशन के बाद दर्द भी कम रहता है और मरीज जल्दी रिकवर होकर सामान्य जीवन में लौट पाते हैं। इस तकनीक में हाई-डेफिनिशन 3D विज़न और अत्यंत सटीक कंट्रोल की सुविधा होती है, जिससे डॉक्टर जटिल से जटिल सर्जरी को भी अधिक सुरक्षित और प्रभावी तरीके से कर सकते हैं।
बालको मेडिकल सेंटर के हेड सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, डॉ. दिवाकर पांडेय के अनुसार, यह तकनीक कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में एक गेम-चेंजर साबित होगी। उनका कहना है कि रोबोटिक सिस्टम के जरिए ऑपरेशन करते समय शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को सुरक्षित रखते हुए सटीकता के साथ सर्जरी करना संभव हो जाता है, जिससे मरीजों की जटिलताओं का खतरा काफी कम हो जाता है।
वहीं वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. भावना सिरोही ने इसे संस्थान की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस तकनीक से मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज की सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेगी। इससे न केवल इलाज की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि मरीजों का भरोसा भी बढ़ेगा।
बालको मेडिकल सेंटर के सीईओ राजेश कुमार ने भी इस पहल को मरीजों के लिए एक बड़ी राहत बताया। उन्होंने कहा कि अब लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। इससे मरीजों का समय, पैसा और मानसिक तनाव तीनों कम होंगे।
अब तक 12,000 से अधिक सफल सर्जरी कर चुका बालको मेडिकल सेंटर, इस नई तकनीक के साथ और अधिक सशक्त हो गया है। रोबोटिक सर्जरी के इस कदम से यह साफ है कि छत्तीसगढ़ अब मेडिकल सुविधाओं के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।