पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक और बड़ा बयान सामने आया है, जिसने कूटनीतिक समीकरणों को और उलझा दिया है। Iran ने साफ तौर पर यह कह दिया है कि United States के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं हो रही है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद अब तक दोनों देशों के बीच न तो सीधी और न ही अप्रत्यक्ष वार्ता हुई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि पिछले 31 दिनों में अमेरिका की ओर से केवल बातचीत के प्रस्ताव भेजे गए हैं, लेकिन इन्हें वार्ता नहीं कहा जा सकता। उनके अनुसार ये प्रस्ताव पाकिस्तान जैसे तीसरे देशों के माध्यम से ईरान तक पहुंचे, जिन्हें केवल सुझाव या पहल के तौर पर देखा जा सकता है, न कि औपचारिक बातचीत के रूप में।
बकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी दोहराया कि “इन 31 दिनों में अमेरिका के साथ हमारी कोई बातचीत नहीं हुई, केवल प्रस्ताव और सुझाव भेजे गए हैं।” इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि ईरान फिलहाल किसी भी तरह की बातचीत को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।
ईरान ने यह भी साफ किया कि मौजूदा हालात में उसका पूरा ध्यान अपनी सुरक्षा और जवाबी रणनीति पर केंद्रित है। मंत्रालय के मुताबिक, पिछले कूटनीतिक अनुभवों को देखते हुए ईरान अब किसी भी वार्ता को लेकर बेहद सतर्क है और बिना ठोस शर्तों के आगे बढ़ने को तैयार नहीं है।
वहीं दूसरी ओर White House का रुख इससे बिल्कुल अलग नजर आ रहा है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट के मुताबिक, वार्ता की प्रक्रिया “अच्छी तरह प्रगति कर रही है।” खुद Donald Trump भी कई बार यह संकेत दे चुके हैं कि किसी समझौते की संभावना अभी खत्म नहीं हुई है।
हालांकि जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। Iran–US–Israel conflict 2026 अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी और अब तक इसके थमने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं।
शांति की कोशिशें भी अब तक सफल नहीं हो पाई हैं। अमेरिका द्वारा पेश की गई 15 सूत्रीय शांति योजना को ईरान ने खारिज कर दिया है। इसके जवाब में ईरान ने अपनी शर्तें रखी हैं, जिनमें युद्ध हर्जाना, आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता को मान्यता देना शामिल है।
कुल मिलाकर, एक तरफ अमेरिका बातचीत की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान उसे सिरे से नकार रहा है। ऐसे में यह टकराव सिर्फ सैन्य मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी गहराता नजर आ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।