छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बिजली ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। Chhattisgarh State Power Transmission Company ने जमीन की कमी को ध्यान में रखते हुए अब पारंपरिक हाईटेंशन टावरों की जगह मोनो पोल तकनीक से पारेषण लाइनों का विस्तार शुरू कर दिया है। यह तकनीक खासतौर पर शहरी इलाकों के लिए बेहद कारगर मानी जा रही है।
इस नई व्यवस्था के तहत राजधानी से लगे मेटल पार्क क्षेत्र में करीब 250 मीटर लंबी 132/33 केवी लाइन में मोनो पोल लगाए गए हैं। ये पोल अब धीरे-धीरे पारंपरिक बड़े टावरों की जगह लेंगे। कंपनी का कहना है कि जहां भी जमीन की कमी होगी, वहां इस तकनीक को प्राथमिकता दी जाएगी।
दरअसल, अब तक हाईटेंशन टावर लगाने के लिए काफी ज्यादा जगह की जरूरत पड़ती थी—करीब 1000 से 2000 वर्गफीट प्रति टावर। लेकिन मोनो पोल तकनीक में सिर्फ लगभग 50 वर्गफीट जमीन ही पर्याप्त होती है। यही वजह है कि शहरों में, जहां जमीन मिलना मुश्किल होता है, यह विकल्प बेहद उपयोगी साबित हो रहा है।
कंपनी के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला के अनुसार, मोनो पोल न केवल कम जगह घेरते हैं, बल्कि देखने में भी आकर्षक होते हैं और सुरक्षा के लिहाज से ज्यादा बेहतर हैं। इन पर आम लोगों का चढ़ पाना मुश्किल होता है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना भी कम हो जाती है।
राजधानी के उरला-सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित मेटल पार्क के 132/33 केवी सब-स्टेशन से जो नई लाइन बिछाई गई है, उसमें करीब 100 फीट ऊंचे मोनो पोल का इस्तेमाल किया गया है। इस परियोजना पर लगभग 8 करोड़ रुपये की लागत आई है और इसे कंपनी ने अपने कैपिटल इंवेस्टमेंट प्लान के तहत पूरा किया है।
नई लाइन को मेटल पार्क के उपकेंद्र से जोड़कर बिजली आपूर्ति भी शुरू कर दी गई है, जिससे उद्योगों को बेहतर और स्थिर बिजली मिल सकेगी।
कुल मिलाकर, मोनो पोल तकनीक न सिर्फ जमीन की बचत करेगी, बल्कि शहरों में बिजली व्यवस्था को और आधुनिक, सुरक्षित और प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।