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1 अप्रैल से जेब पर असर! गैस महंगी, टोल कैशलेस, सैलरी स्ट्रक्चर बदला—जानिए 15 बड़े बदलाव

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नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत आम लोगों के लिए कई अहम बदलाव लेकर आई है। 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए इन फैसलों का सीधा असर रसोई, सफर, सैलरी, टैक्स और बैंकिंग से लेकर निवेश तक हर क्षेत्र में दिखाई देगा। जहां कुछ बदलाव सिस्टम को आसान बनाने के लिए हैं, वहीं कई फैसले जेब पर अतिरिक्त बोझ भी डाल सकते हैं।

सबसे पहले बात करें रसोई और खाने-पीने की लागत की, तो कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में ₹218 तक की बढ़ोतरी ने होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट चलाने वालों की लागत बढ़ा दी है। इसका असर अब सीधे ग्राहकों पर दिख सकता है, क्योंकि चाय, नाश्ता और खाने की कीमतों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। हालांकि घरेलू गैस सिलेंडर फिलहाल राहत में है और उसकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

सफर करने वालों के लिए भी नियम सख्त हो गए हैं। अब ट्रेन टिकट रद्द करने पर रिफंड तभी मिलेगा जब टिकट ट्रेन छूटने से कम से कम 8 घंटे पहले कैंसिल किया जाए। पहले यह समय 4 घंटे था। इसके अलावा टोल प्लाजा पूरी तरह कैशलेस हो गए हैं, जहां अब भुगतान केवल FASTag या UPI के जरिए ही होगा। कैश की सुविधा खत्म होने से बिना बैलेंस वाले यात्रियों को परेशानी हो सकती है।

वाहन खरीदने वालों के लिए भी झटका है, क्योंकि 1 अप्रैल से गाड़ियों की कीमतों में 2 से 3 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गई है। ऐसे में अगर आपने 31 मार्च तक बिल नहीं कटवाया था, तो अब आपको बढ़ी हुई कीमत चुकानी पड़ेगी।

टैक्स सिस्टम में भी बड़ा बदलाव लागू हुआ है। Income Tax Act 2025 के लागू होने के साथ अब ‘असेसमेंट ईयर’ की जगह सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ का इस्तेमाल होगा, जिससे प्रक्रिया को सरल बनाने की कोशिश की गई है। साथ ही नए टैक्स स्लैब के तहत 12 लाख से 12.75 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स छूट का लाभ मिल सकता है, जिससे मध्यम वर्ग को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

ITR फाइलिंग प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। अब फॉर्म 16 और 16A की जगह नए फॉर्म 130 और 131 लागू किए गए हैं, जिनमें टैक्स की जानकारी अधिक विस्तार से दी जाएगी। वहीं HRA पर छूट लेने के नियम भी सख्त कर दिए गए हैं, जहां अब किराया रसीद और मकान मालिक का PAN देना अनिवार्य होगा।

बैंकिंग सेक्टर में भी बदलाव हुए हैं। पंजाब नेशनल बैंक ने ATM से कैश निकालने की सीमा तय कर दी है, जिससे अब एक दिन में सीमित रकम ही निकाली जा सकेगी। वहीं शेयर बाजार में F&O ट्रेडिंग पर टैक्स बढ़ने से ट्रेडर्स की लागत बढ़ेगी और मुनाफा घट सकता है।

निवेश के क्षेत्र में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के नियम भी बदल गए हैं। अब मैच्योरिटी पर टैक्स छूट सिर्फ उन्हीं को मिलेगी, जिन्होंने सीधे RBI से बॉन्ड खरीदा है। सेकेंडरी मार्केट से खरीदने वालों को अब टैक्स देना होगा।

सैलरी स्ट्रक्चर में सबसे बड़ा बदलाव नए लेबर कोड के तहत आया है। अब कर्मचारियों की बेसिक सैलरी उनके कुल CTC का कम से कम 50% होनी जरूरी है। इससे इन-हैंड सैलरी कम हो सकती है, लेकिन PF और ग्रेच्युटी जैसे रिटायरमेंट बेनिफिट्स मजबूत होंगे।

नौकरी बदलने वालों के लिए एक राहत भरी खबर भी है। अब कंपनियों को कर्मचारी का फुल एंड फाइनल सेटलमेंट 2 वर्किंग डेज के भीतर करना होगा, जिससे महीनों का इंतजार खत्म हो जाएगा।

इसके अलावा PAN कार्ड के नियम भी सख्त कर दिए गए हैं। अब जन्मतिथि के प्रमाण के लिए आधार कार्ड मान्य नहीं होगा, बल्कि जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं की मार्कशीट देना जरूरी होगा।

कुल मिलाकर, 1 अप्रैल से लागू हुए ये 15 बदलाव हर आम नागरिक के जीवन को किसी न किसी रूप में प्रभावित करेंगे। ऐसे में जरूरी है कि लोग इन नियमों को समझें और अपनी दैनिक जिंदगी व वित्तीय योजनाओं को उसी अनुसार ढालें।

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