दक्षिण भारत की सियासत में हलचल तेज होने वाली है, क्योंकि नरेंद्र मोदी शुक्रवार से तमिलनाडु और पुडुचेरी के अहम दो दिवसीय चुनावी दौरे पर निकल चुके हैं। विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह दौरा न सिर्फ राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इसे दक्षिण में भाजपा और एनडीए की मजबूती के लिए निर्णायक कदम के तौर पर भी देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री सबसे पहले चेन्नई पहुंचेंगे और वहां से सीधे पुडुचेरी रवाना होंगे, जहां शाम को एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। यह जनसभा 9 अप्रैल को होने वाले मतदान के मद्देनजर एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित की जा रही है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री पुडुचेरी में एक भव्य रोड शो भी करेंगे, जिसमें करीब 30 हजार लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। यह रोड शो अजंता जंक्शन से अन्ना स्क्वायर तक करीब 1.7 किलोमीटर की दूरी तय करेगा, जो पूरी तरह राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का रूप ले सकता है।
पुडुचेरी में यह अभियान National Democratic Alliance के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, जहां सत्तारूढ़ All India N.R. Congress के नेतृत्व में गठबंधन चुनाव मैदान में है। प्रधानमंत्री की मौजूदगी इस चुनावी लड़ाई में एनडीए को अतिरिक्त बढ़त दिलाने की कोशिश मानी जा रही है।
इस हाई-प्रोफाइल दौरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह अलर्ट हैं। चेन्नई और पुडुचेरी दोनों जगहों पर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं, साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था में भी कई बदलाव किए गए हैं ताकि कार्यक्रम बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।
दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री चेन्नई में पार्टी के लगभग 100 प्रमुख पदाधिकारियों और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ एक अहम बैठक करेंगे। यह बैठक पूरी तरह रणनीतिक होगी, जिसमें बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और 23 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए अंतिम रणनीति तय की जाएगी। इसके अलावा मायलापुर में भी प्रधानमंत्री एक चुनावी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे, जो चेन्नई का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है।
सूत्रों के अनुसार, टी. नगर जैसे प्रमुख इलाकों में रोड शो की योजना भी बनाई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। लेकिन इतना तय है कि इस दौरे के जरिए भाजपा तमिलनाडु में अपनी पकड़ मजबूत करने और चुनावी समीकरण बदलने की पूरी कोशिश में जुटी है।
प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल रैलियों और रोड शो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने, संगठन को सक्रिय करने और दक्षिण भारत में राजनीतिक जमीन को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस दौरे का चुनावी परिणामों पर कितना असर पड़ता है।