बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव एक बार फिर कानूनी मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही चेक बाउंस मामले की सुनवाई के दौरान वे भावुक हो गए और अदालत से अतिरिक्त समय की गुहार लगाई, लेकिन कोर्ट ने साफ शब्दों में उनकी यह मांग ठुकरा दी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए राजपाल यादव ने अदालत से बकाया रकम चुकाने के लिए 30 दिन का समय मांगा था। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि “नहीं मतलब नहीं” और मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि यदि भुगतान करने की मंशा है, तो देरी क्यों हो रही है।
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने दावा किया कि अभिनेता पर अभी भी करीब 7.75 करोड़ रुपए बकाया हैं। वकील अवनीत सिंह सिक्का ने अदालत में बताया कि राजपाल यादव पहले ही 10 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं कर पाने की बात स्वीकार कर चुके हैं। हालांकि उन्होंने ट्रायल कोर्ट से पहले करीब 2 करोड़ रुपए जमा किए थे, लेकिन बाकी राशि अब भी बाकी है।
मामले में एक समय ऐसा भी आया जब अदालत ने समझौते की संभावना टटोलते हुए संकेत दिया कि यदि कम समय में 6 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाता है, तो विवाद सुलझ सकता है। शिकायतकर्ता पक्ष इस प्रस्ताव पर सहमत भी दिखा, लेकिन तय समयसीमा और भुगतान को लेकर सहमति नहीं बन सकी।
इसी दौरान राजपाल यादव भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही भारी रकम चुका दी है, यहां तक कि उन्हें अपने पांच फ्लैट तक बेचने पड़े। उन्होंने अदालत में कहा, “मैं भावुक नहीं हूं, मुझे पांच बार और जेल भेज दो, लेकिन मैं फिर भी लड़ूंगा।” उनकी इस टिप्पणी ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया।
दरअसल, यह मामला साल 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी फिल्म अता पता लापता के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। फिल्म के फ्लॉप होने के बाद वे समय पर कर्ज नहीं चुका सके। लोन के बदले दिए गए चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा।
2018 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की और कई बार राहत भी मिली, लेकिन भुगतान में देरी के कारण मामला फिर उलझ गया। फरवरी 2026 में अदालत ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था, जिसके बाद उन्होंने जेल भी काटी और बाद में अंतरिम जमानत पर रिहा हुए।
अब इस पूरे मामले में अगला फैसला अदालत के सुरक्षित आदेश पर टिका है। यह केस न केवल एक्टर की कानूनी स्थिति को प्रभावित करेगा, बल्कि यह भी दिखाता है कि आर्थिक विवादों में अदालत कितनी सख्ती से फैसले ले रही है।