छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश मंत्री Kishor Devangan ने इसे डबल इंजन सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति और निर्णायक नेतृत्व का नतीजा बताते हुए ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया है। उनका कहना है कि यह बदलाव सिर्फ सुरक्षा का नहीं, बल्कि पूरे राज्य की दिशा और पहचान बदलने वाला कदम है।
देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के नेतृत्व में, मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai और गृह मंत्री Vijay Sharma की जोड़ी ने तय समय सीमा के भीतर नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ का लक्ष्य हासिल कर लिया है। उनके मुताबिक, एक समय ऐसा था जब नक्सलवाद राज्य की पहचान बन चुका था और इसकी वजह से प्रदेश की छवि राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित होती थी।
उन्होंने यह भी कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में दशकों तक बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव रहा। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और विकास के अन्य संसाधन लाल आतंक के कारण ठप पड़े रहते थे। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। उनका दावा है कि आने वाले समय में राज्य “विकसित भारत” के साथ कदम मिलाकर “विकसित छत्तीसगढ़” की पहचान बनाएगा।
नक्सलवाद के इतिहास पर बोलते हुए देवांगन ने कहा कि इसकी शुरुआत 1967 में हुई थी और यदि शुरुआती दौर में ही सख्त कदम उठाए जाते, तो यह समस्या इतनी बड़ी न बनती। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों तक यह समस्या देश के कई हिस्सों में बनी रही, जिससे हजारों लोगों और सुरक्षा बलों की जानें गईं और विकास कार्य बाधित हुए।
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि मौजूदा सरकारों ने इस समस्या को जड़ से खत्म करने का काम किया है और अब इसे दोबारा पनपने का मौका नहीं मिलेगा। उनके अनुसार, सरकार की प्राथमिकता सत्ता नहीं, बल्कि देश और जनता का हित है। उन्होंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और राज्य नेतृत्व को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए इसे नए छत्तीसगढ़ की शुरुआत बताया।