रायपुर से सामने आई यह वारदात सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि इंसानियत को झकझोर देने वाली क्रूरता की कहानी बन गई है। एक युवक को पहले बेरहमी से पीटा गया, फिर अधमरी हालत में ऑटो में डालकर करीब 40 किलोमीटर तक घुमाया गया और आखिर में जिंदा ही जमीन में दफना दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने कानून-व्यवस्था और समाज दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना अभनपुर थाना क्षेत्र की है, जहां पांच दिन बाद एक मुरूम खदान से युवक का शव बरामद हुआ। जब ग्रामीणों की नजर उस गड्ढे पर पड़ी, तो उन्होंने देखा कि जमीन से एक हाथ और एक पैर बाहर निकला हुआ है। यह दृश्य इतना भयावह था कि तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची टीम ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव को बाहर निकाला और जांच शुरू की।
मृतक की पहचान नितेश बत्रा (29) के रूप में हुई, जो शदाणी दरबार इलाके का रहने वाला था और रायपुर में ठेकेदारी करता था। बताया जा रहा है कि वह पाकिस्तानी मूल का था और उसे भारतीय नागरिकता नहीं मिली थी, लेकिन वह लंबे समय से यहीं रह रहा था।
पूरी कहानी की शुरुआत एक प्रेम संबंध से हुई। आरोपी श्याम सुंदर सोनी का सावित्री साहू के साथ अफेयर था। आरोप है कि नितेश बत्रा सावित्री को बार-बार फोन कर परेशान करता था। यही बात श्याम को नागवार गुजर रही थी और अंदर ही अंदर गुस्सा बढ़ता जा रहा था।
16 मार्च की रात यह विवाद अचानक हिंसा में बदल गया। नितेश सावित्री के घर माना पहुंचा, जहां पहले से मौजूद श्याम से उसका सामना हो गया। बहस शुरू हुई और देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। श्याम ने अपने दो कर्मचारियों को भी बुला लिया और तीनों ने मिलकर नितेश को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। लाठी से सिर पर वार किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गया।
लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह और भी खौफनाक था। आरोपियों ने बेहोश नितेश को ऑटो में डाला और उसे ठिकाने लगाने की योजना बना ली। रास्ते में उसकी स्कूटी को पुलिया में फेंक दिया गया ताकि सबूत मिटाया जा सके। फिर वे उसे लेकर करीब 35 से 40 किलोमीटर दूर अभनपुर की ओर निकल पड़े।
हैरानी की बात यह है कि इस दौरान आरोपी मुजगहन, माना, टिकरापारा और अभनपुर जैसे चार थाना क्षेत्रों से होकर गुजरे, लेकिन किसी को शक तक नहीं हुआ। यह लापरवाही भी अब जांच का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है।
भरेंगाभाठा गांव के पास पहुंचकर आरोपियों ने एक बार फिर नितेश के साथ मारपीट की और गमछे से गला घोंटने की कोशिश की। इसके बाद उसे परसुलीडीह और भरेंगाभाठा के बीच स्थित एक मुरूम खदान में ले जाकर गड्ढा खोदा और जिंदा ही दफना दिया। वह सांस ले रहा था, लेकिन मिट्टी के नीचे दबकर उसकी जिंदगी खत्म हो गई।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने इस बर्बरता की पुष्टि कर दी। रिपोर्ट के अनुसार, युवक की मौत गला दबाने और सांस नली में मिट्टी भर जाने से हुई, यानी उसे जिंदा दफनाया गया था।
पुलिस ने तकनीकी जांच, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिरों की मदद से मामले का खुलासा किया। अब तक श्याम सुंदर सोनी, सावित्री साहू, सुमित कोसले और दो नाबालिगों समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। घटना में इस्तेमाल ऑटो, लकड़ी और अन्य सामान भी जब्त कर लिया गया है। वहीं एक अन्य आरोपी माइकल सैनी अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।
यह पूरी घटना कई गंभीर सवाल छोड़ जाती है—क्या एकतरफा गुस्सा इतनी बर्बरता में बदल सकता है? क्या चार थानों से गुजरते हुए भी पुलिस को भनक न लगना सिस्टम की बड़ी चूक नहीं है? और सबसे अहम, क्या समाज में बढ़ती हिंसा अब इंसानियत को पीछे छोड़ती जा रही है?