छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है, जिसने सालों से मुख्यालयों में आरामदायक पदों पर काम कर रहे डॉक्टरों और कर्मचारियों के बीच हलचल मचा दी है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के आदेश के बाद अब सभी तरह के संलग्नीकरण यानी अटैचमेंट समाप्त किए जा रहे हैं, जिससे संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर लौटना अनिवार्य होगा।
दरअसल, लंबे समय से यह स्थिति बनी हुई थी कि कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी, जिनकी पोस्टिंग सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में थी, वे मुख्यालयों, सीएमएचओ कार्यालय, स्वास्थ्य संचालनालय और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय में अटैचमेंट लेकर प्रशासनिक कामों में लगे हुए थे। इसका सीधा असर ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों पर पड़ रहा था, जहां डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है।
अब सरकार ने इस व्यवस्था पर सख्ती दिखाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों को वापस उनके मूल कार्यस्थल पर भेजा जाएगा। हालांकि, इस फैसले के बाद भी कई जगहों पर रिलीविंग ऑर्डर जारी होने में देरी हो रही है, जिससे स्थिति थोड़ी उलझी हुई बनी हुई है।
रायपुर जिले की बात करें तो यहां मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में ही 50 से ज्यादा कर्मचारी अटैचमेंट के जरिए काम कर रहे हैं। इनमें कई डॉक्टर ऐसे भी शामिल हैं, जो मरीजों का इलाज करने के बजाय प्रशासनिक जिम्मेदारियों में लगे हुए थे।
एक और चुनौती ‘हमर क्लीनिक’ योजना को लेकर सामने आ रही है। रायपुर जिले में करीब 70 हमर क्लीनिक स्थापित किए जाने हैं, जिनमें से फिलहाल 50 ही चालू हैं। बाकी क्लीनिकों के लिए नियुक्त स्टाफ फिलहाल दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों में अटैचमेंट के तहत कार्य कर रहा है। अब जब अटैचमेंट खत्म किया जा रहा है, तो इन कर्मचारियों को ऐसे स्थानों पर भेजने की स्थिति बनेगी, जहां अभी क्लीनिक पूरी तरह शुरू ही नहीं हुए हैं।
इस पूरे मामले पर रायपुर के सीएमएचओ डॉ. मिथिलेश चौधरी ने साफ कहा है कि नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है और सभी संबंधित डॉक्टरों व कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजा जाएगा।
यह फैसला जहां एक ओर स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से मुख्यालयों में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ा बदलाव साबित हो रहा है। अब देखना यह होगा कि इस आदेश के लागू होने के बाद स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी कितनी हद तक दूर हो पाती है।