ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध अब छठे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है, और इसका असर अब कूटनीतिक मोर्चों पर भी दिखने लगा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए बताया कि कम से कम चार ईरानी नागरिकों के ग्रीन कार्ड और वीजा रद्द कर दिए गए हैं।
प्रशासन का तर्क है कि ये व्यक्ति अमेरिका में रहकर ‘स्थायी निवासी’ (LPR) का लाभ उठा रहे थे, लेकिन सार्वजनिक रूप से ईरानी आतंकवादी शासन और अमेरिकियों पर हुए हमलों का समर्थन कर रहे थे। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच सैन्य संघर्ष चरम पर है।
सुलेमानी की भतीजी और पोती लॉस एंजिल्स से गिरफ्तार
इस कार्रवाई में सबसे बड़ा नाम हमीदेह सुलेमानी अफशार का है, जो 2020 में मारे गए ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की भतीजी बताई जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हमीदेह और उनकी बेटी को लॉस एंजिल्स से ICE एजेंटों ने हिरासत में लिया है।
विदेश विभाग का कहना है कि ये दोनों कई वर्षों से अमेरिका में ‘शानदार जीवन’ जी रही थीं, लेकिन साथ ही सोशल मीडिया पर अमेरिका को ‘ग्रेट सैटन’ बता रही थीं। मार्को रूबियो ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हमीदेह ने अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमलों का जश्न मनाया था, जिसके कारण वे अब अमेरिका में रहने की पात्रता खो चुकी हैं।
पूर्व ईरानी सुरक्षा सलाहकार की बेटी पर भी गिरी गाज
केवल सुलेमानी का परिवार ही नहीं, बल्कि ईरान के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अली लारीजानी की बेटी फातिमा अर्देशिर-लारीजानी और उनके पति सैयद कलंतर मोतामेदी के वीजा भी रद्द कर दिए गए हैं।
फातिमा अमेरिका में एक अकादमिक के रूप में काम कर रही थीं। अली लारीजानी पिछले महीने एक अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में मारे गए थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के संबंध सीधे या परोक्ष रूप से ईरानी शासन से हैं और जो अमेरिकी हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं, उन्हें देश छोड़ना होगा।
सुरक्षा प्रोटोकॉल और निर्वासन की प्रक्रिया शुरूअमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) विभाग ने पुष्टि की है कि हिरासत में लिए गए लोगों को निर्वासन की प्रक्रिया के लिए रखा गया है। विदेश मंत्री रूबियो ने चेतावनी दी है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका को उन विदेशी नागरिकों का घर नहीं बनने देगा जो “अमेरिकी विरोधी आतंकवादी शासनों” का समर्थन करते हैं।
यह कदम अमेरिका की नई ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा है, जिसके तहत उन सभी विदेशी नागरिकों की स्क्रीनिंग तेज कर दी गई है जो दुश्मन देशों के शासन से सहानुभूति रखते हैं। आने वाले महीनों में रूस और अन्य मध्य-पूर्वी देशों के नागरिकों के खिलाफ भी ऐसे और कदम उठाए जा सकते हैं।