बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 8 अप्रैल से न्यायिक कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नए रोस्टर के तहत अब अदालत में सुनवाई का ढांचा पहले से ज्यादा व्यवस्थित और विभाजित किया गया है, जिससे मामलों के तेजी से निपटारे की उम्मीद जताई जा रही है। इस नई व्यवस्था में तीन डिवीजन बेंच के साथ-साथ तेरह सिंगल बेंचों में नियमित रूप से सुनवाई की जाएगी, जो न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाएगा।
नई व्यवस्था के तहत पहली डिवीजन बेंच में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल को महत्वपूर्ण मामलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह बेंच जनहित याचिकाओं, हेबियस कॉर्पस, वर्ष 2020 तक की आपराधिक अपीलों, अवमानना से जुड़े आपराधिक मामलों, धारा 482 के अंतर्गत आवेदन तथा धारा 419 और 378 से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी। इससे स्पष्ट है कि संवेदनशील और जनहित से जुड़े मामलों को इस बेंच के तहत प्राथमिकता दी जाएगी।
दूसरी डिवीजन बेंच में जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत को सिविल मामलों की जिम्मेदारी दी गई है। यह बेंच सभी सिविल विवादों, कंपनी अपील, टैक्स मामलों और वर्ष 2022 तक के अल्ट्रा वायर्स मामलों की सुनवाई करेगी। साथ ही यह बेंच कमर्शियल अपीलेट के रूप में भी कार्य करेगी, जिससे व्यापारिक विवादों के निपटारे में तेजी आने की संभावना है।
तीसरी डिवीजन बेंच का गठन जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस एन. के. व्यास के साथ किया गया है। इस बेंच को उन आपराधिक मामलों की सुनवाई सौंपी गई है, जो अन्य किसी डिवीजन बेंच के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। इसके अलावा वर्ष 2016 तक की एक्विटल अपील और 2022 तक के अल्ट्रा वायर्स मामलों की सुनवाई भी यही बेंच करेगी।
इन डिवीजन बेंचों के अलावा चीफ जस्टिस की विशेष सिंगल बेंच सहित कुल 13 सिंगल बेंचों का गठन किया गया है, जहां नियमित रूप से विभिन्न मामलों की सुनवाई होगी। यह नई व्यवस्था न्यायालय में लंबित मामलों को कम करने और सुनवाई की गति बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की जा रही है।
कुल मिलाकर, हाईकोर्ट के इस नए रोस्टर को न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और तेज बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे आम लोगों को समय पर न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत होगी।